टीकमगढ़, के पास पवित्र अतिशय क्षेत्र पपौरा जी में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत आज जन्म कल्याणक दिवस बड़े ही दिव्य उत्साह, भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि जन्म कल्याण के तृतीय दिवस पर प्रातः 6:00 बजे से ही जन सैलाब पहुंचने लगा
सुबह से ही समस्त परिसर में भक्ति, मंगल ध्वनियों और देव–दुंदुभियों इंद्र इंद्राणियों के साथ वातावरण आलोकित हो उठा।
सौधर्म इंद्र द्वारा सहस्र नेत्र से दिव्य शिशु के दर्शन की अनूठी क्रिया का अवलोकन करते ही उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। यह क्षण सभी के लिए अविस्मरणीय और अत्यंत पवित्र रहा। दूर -दूर इलाकों से सैकड़ो की संख्या में पधारे जैन समाज एवं टीकमगढ़ से पधारे महिला पुरुष एवं महिला मंडल अनेक जैन संस्थाओं ने महाराज नाभी राय के दरबार में एक घंटे तक गीत गाकर भक्ति की
इसके उपरांत भव्य जन्म कल्याणक जुलूस निकाला गया, जिसमें विभिन्न पात्रगण, महिला मंडल, इन्द्र–इन्द्राणियाँ, बैंड–बाजे, डोल–नगाड़े और उत्साह से भरे हुए भक्तजन शामिल रहे।
श्रृंगारित रथ में विराजमान बालक प्रभु का पपौरा जी क्षेत्र परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
पूरा आयोजन दिव्यता, व्यवस्था और भक्ति से सराबोर रहा।
माता-पिता ने बाटे लड्डू भगवान के जन्म कल्याण पर बना नया पंडाल भी कम पड़ गया
इसके बाद महाराज श्री पट्टाचार्य 108 विशुद्ध सागरजी महा मुनिराज ने प्रवचन में कहा की प्राणी मात्र पर दया भाव रखना ही सच्ची अहिंसा है किसी भी दुखी जीव को णमोकार मंत्र सुना कर सात्वना देना ही वास्तविक पुण्य का उदय है,

