टीकमगढ़। शहीद ए कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मंगलवार रात शहर में चेहल्लुम अरबईन पर्व श्रद्धा अकीदत और मातमी माहौल के बीच मनाया गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए जिन्होंने प्रमुख मार्गों का भ्रमण किया। नगर भ्रमण के बाद सभी ताजियों को किले के मैदान में एकत्र किया गया जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर ताजियों के दर्शन किए और अकीदत पेश की।
चेहल्लुम मुस्लिम समाज का महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है, जिसे शहीद ए कर्बला की शहादत के 40वें दिन मनाया जाता है। इसे अरबईन के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर इमाम हुसैन के त्याग सत्य न्याय और इंसानियत के लिए दिए गए बलिदान को याद किया गया। धार्मिक विद्वानों ने बताया कि इमाम हुसैन पैगंबर ए इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे थे जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध डटकर संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान देकर पूरी मानवता को सत्य और इंसाफ का संदेश दिया।
चेहल्लुम केवल शोक का पर्व नहीं बल्कि साहस सब्र त्याग और मानवता की रक्षा के लिए संघर्ष की प्रेरणा देने वाला अवसर भी माना जाता है। मातमी जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं ने गमगीन माहौल में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराज ए अकीदत पेश की।
शहर में चेहल्लुम पर्व के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। प्रमुख मार्गों संवेदनशील क्षेत्रों और किले के मैदान में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस अधिकारियों ने पूरे आयोजन पर लगातार निगरानी रखी।
टीकमगढ़ में चेहल्लुम के अवसर पर दो दिन तक ताजिया निकालने की परंपरा है। पहले दिन नगर भ्रमण के बाद ताजियों को किले के मैदान में एकत्र किया जाता है जबकि दूसरे दिन महेंद्र सागर तालाब स्थित विसर्जन कुंड में धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों का विसर्जन किया जाएगा।


