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धर्म के लिए लड़ो मत सभी धर्म अच्छे हैं : मुनिश्री विरंजन सागर

दीक्षा के आठ वर्ष पूर्ण होने पर मनाया संयम संस्कार महाेत्सव

समीर खान, टीकमगढ़ नगर मे विराजमान परमपूज्य उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागरजी महाराज की दीक्षा के आठ वर्ष र्पूण होने के पावन दिवस पर बाजार जैन मन्दिर परिसर मे संयम संस्कार महोत्सव मनाया गया।परमपूज्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागरजी महाराज द्धारा 13 फरवरी 2006 मे क्षुल्लक दीक्षा ओर 18 जनवरी 2016 मे मुनि दीक्षा दी गई है के चरणों नमोस्तु करते हुये उपाध्याय श्री विरंजन सागरजी महाराज ने अपने प्रवचनों मे कहा कि धर्म के लिए मत लड़ो, सभी धर्म अच्छे हैं ,दूसरों के धर्म पर अपने धर्म की बेहतरी स्थापित करने की कोशिश न करो। सभी धर्म अच्छे होते है। ये सब तुम्हें भगवान तक ले जाने के अलग-अलग रास्ते है। इसी प्रकार सभी गुरु महान हैं। वे सब तुम्हें अन्तिम लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए आवश्यक सीख और रास्ता दिखाने वाले शिक्षक हैं। अतः अन्त में लक्ष्य समान है, केवल रास्ते और गुरु अलग-अलग हैं। जो भी तुम्हें सुविधाजनक लगे उसे चुन सकते हो, लेकिन सभी धर्मों और गुरुओं के प्रति समान आदर की भावना रखो। उच्च स्तर के सभी संत और गुरु समान बन जाते हैं। वहां कोई अन्तर नहीं रहता। अतः एक दूसरे पर महत्ता स्थापित करने और अनावश्यक तुलना करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। जो धर्मों की तुलना करके लड़ता है उससे अधिक अधार्मिक व्यक्ति कोई नहीं है।किसी विशेष धर्म या मत के प्रति मतान्ध होना अपने मन-मस्तिष्क के आगे अवरोधक रखने समान है एक विशेष सीमा के आगे नही देख सकता। जब तक तुम अपने मन को विशाल नहीं बनाओगे तुम अन्तिम लक्ष्य तक पहुँचने की उम्मीद नहीं कर सकते। तुम अपनी यात्रा एक विशेष बिंदु पर आ कर रोक दोगे और आगे नहीं बढ़ सकोगे संपत्ति वही सार्थक है जो आने वाली विपत्ति में रक्षा कर सके। जो संपत्ति आज अर्जित की जा रही है विश्वास से कह सकते हैं, आने वाली समस्त विषम परिस्थितियों में सहायक बन सकेगी? कदाचित अर्जित संपत्ति भौतिक परिस्थितियों को अनुकूल बना सकें लेकिन मन शोक संतप्त अवस्था में हो तो अर्थ सापेक्ष समस्त उपाय निष्फल देखे जाते हैं। 



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