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मध्यप्रदेश लेख संघ की 308वीं कवि गोष्ठी सम्पन्न सुनाई बसंत पर रचनाएं

समीर खान, टीकमगढ़। नगर साहित्यिक संस्था मप्र लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 308वीं बसंत पर केन्द्रित कवि गोष्ठी एक निजी स्कूल में आयोजित की गयी। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता बुजुर्ग शायर हाजी ज़फ़रउल्ला खां ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में बुन्देली कवि प्रभुदयाल श्रीवास्तव एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में शायर शकील खान रहे।कवि गोष्ठी की शुरूआत वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना का यह गीत सुनाया गीत आया बसंत लेकर खुशबू भरी हवाएँ। भँवरे भी गुनगुनाएँ चलो हम भी गीत गाएँ सुनाया जिसमें बसंत के बारे में बताया गया । राजीव नामदेव ने सरस्वतीजी पर दोहे पढ़े रयी सरस्वती की कृपा जुर गए राना मित्र। बुन्देली भाषा बने सब भाषन में इत्र।।रामगोपाल रैकवार ने रचना पढ़ी तजने को तैयार है वृक्ष जो अपने पात। तब जाकर मिलती उसे बासंती सौगात। कलमेश सेन ने रचना पढ़ी  सबका मन हर्षाया देखों बसंत फिर आया। प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने कविता सुनाई-चैक पुरे आँगन में द्वारे बंद गए बंदरवारे। संगै सबइ समाज कै जे रितुराज पधारे। रविन्द्र यादव ने सुनाया-जो झूठ सच को बराबर समझते वो क्या जाने आँखों का मतलब। शकील खान’ ने ग़ज़ल पढ़ी-जबसे मौसम बसंत का आया। प्यार सबके दिलो में छाया। एसआर सरल ने सुनाया भौंरा फलन पै मड़राने रार कलन पैं ठाने। डीपी शुक्ला ने सुनाया-बेला अब बसंत की आई। हाजी ज़फ़र ने कलाम न नाम दुनियाँ में न चाहूँ धन और दौलत को। मुझे वर दे यही माता नमन करूँ अपने भारत को पढ़। इनके अलावा डाॅ मैथिलीशरण श्रीवावास्त पृथ्वीपुर गोविन्द्र सिंह गिदवाहा मड़बरा सत्येन्द्र जैन एवं सीताराम ने कवि गोष्ठी का लाइव रसास्वादन किया।  कवि गोष्ठी का संचालन कमलेश सेन ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन लेखक संघ के सचिव रामगोपाल रैकवार ने किया। अंत में आचार्य श्री 1008 विद्यासागर महाराज के स्वर्गवास एवं युवा कवि कमलेश सेन के चाचा घनश्याम सेन के निधन पर दो मिनिट का मौन रखकर सभी ने अपनी श्रद्धांजलि दी।


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