सुदामा चरित्र के साथ 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ का हुआ विराम
छतरपुर। सिद्ध क्षेत्र बागेश्वर धाम में पिछले एक सप्ताह से ज्ञान गंगा का अविरल प्रवाह देखने को मिला। संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का सुदामा चरित्र के साथ विराम हो गया। कथाव्यास बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सरस भाव से सुनाते हुए कहा कि सुदामा जब अपने बाल सखा द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे तो भगवान ने उन्हें वह सब दे दिया जिसकी कभी कल्पना नहीं की जा सकती। जो भी भगवान के सानिध्य में आता है वह समर्थ बन जाता है।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर महाराजश्री ने सप्त दिवसीय कथा महोत्सव के विराम दिवस में मित्रता के गुण बताए। उन्होंने कहा कि मित्र वही है जो अपने मित्र की संकटकाल में सहयोग करता है। महाराजश्री ने कहा कि सुदामा से भगवान श्रीकृष्ण की अटूट मित्रता थी, भगवान के लिए सुदामा ने श्रापित चने खा लिए थे ताकि उनका सखा उन चने को खाने से निर्धन न हो जाए। भगवान श्रीकृष्ण ने भी वैसे ही मित्रता निभायी। सुदामा जी जब श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे तो उन्हें दो लोकों का स्वामी बना दिया। श्रीमद् भागवत कथा यह संदेश देती है कि अकिंचन भगवान की कृपा से समर्थ बन जाता है। महाराजश्री ने पूरे सात दिनों तक जीवन मृत्यु के रहस्यों को कथा में प्रमुखता देते रहे। उन्होंने जीवन को उत्सव और मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाने का संदेश दिया। संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा सुनने देश-विदेेश से बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी बागेश्वर धाम में एकजुट हुए। रोज दिन में दरबार के माध्यम से महाराजश्री ने लोगों के दैहिक, दैविक और भौतिक जीवन के कष्टों को हरने के उपाय बताए

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