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बुंदेलखण्ड अलग राज्य बनाने के लिए बुंदेली समाज ने 36वीं बार पीएम को खून से लिखा पत्र

शंकरलाल मेहरोत्रा के 76वें जन्मदिन को बुंदेली दिवस के रुप में मनाया

महोबा। बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के जनक स्व शंकरलाल मेहरोत्रा के 76वें जन्म दिवस को शनिवार को आल्हा चौक स्थित अम्बेडकर पार्क में बुंदेली समाज के लोगों ने बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाया गया। बुंदेली समाज ने बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 36वीं बार एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने अपने खून से खत लिखा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को डाक द्वारा भेजा गया। बुंदेली समाज द्वारा बुंदेलखण्ड अलग राज्य न बनने तक संघर्ष करने की लोगों से अपील की गई।आल्हा चौक स्थित अंबेडकर पार्क में आयोजित कार्यक्रम में बुंदेली समाज के एक दर्जन से अधिक साथियों ने आज खत लिखने के लिए अपना खून दिया और जय जय बुंदेलखंड, जय जय भारत अखंड के नारे लगाए। कार्यक्रम में बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि हमारे पास संसाधन नहीं हैं, इसलिए हम अपने खून से प्रधानमंत्री को खत लिखते हैं। हम बुंदेले अब करेंगे पूरा, शंकर भैया का मिशन अधूरा। कोरोना काल शुरू होने से पहले 635 दिन अनशन कर चुके बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि शंकर भैया का मिशन अधूरा, हम बुंदेले अब करेंगे पूरा।उन्होंने कहा कि वे साधन संपन्न थे और आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले गए। यदि 2001 में उनका आसमयिक निधन न हुआ होता तो बहुत पहले बुंदेलखंड राज्य बन गया होता। अब हम उनके संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं। मोदी सरकार को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए बुंदेलखंड जैसे सभी पिछड़े भूभागों को अलग राज्य का दर्जा देना चाहिए। अटल सरकार ने शायद इसीलिए तीन नये राज्य एक साथ बनाए थे। कार्यक्रम में महामंत्री डा. अजय बरसैया, योगी आदित्यनाथ यूथ ब्रिगेड के वैभव तिवारी, गया प्रसाद, अमरचंद विश्वकर्मा, हरीओम निषाद, भीष्म देव सेन, कृष्णा शंकर जोशी, सिद्धगोपाल सेन, हरीओम ताम्रकार, अजय मिश्र, रमाकांत नगायच व सुरेश बुंदेलखंडी समेत तमाम बुंदेली जन मौजूद रहे।
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