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भर्ती प्रक्रिया मामला : निलंबित होने के बाद पूर्व जीएम रामविशाल पटैरिया ने खोले कई भेद....देखें


कहा अगर एक भी व्यक्ति पात्र नहीं था तो क्यों कराई भर्ती प्रक्रिया

 छतरपुर। छतरपुर जिले के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा 37 सहायक प्रबंधकों को प्रबंधक पद पर भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किये जाने और अब आनन फानन में पूरी चयन समिति पर कार्यवाही न करते हुए केवल पूर्व महाप्रबंधक राम विशाल पटैरिया को निलंबित किये जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जब इस भर्ती प्रक्रिया में स्वयं बैंक अध्यक्ष करुणेंद्र प्रताप सिंह प्रशासक के रूप में जबकि जयकृष्ण चौबे डारेक्टर के रूप में और एसपी कोशिक डीआर के रूप में संयुक्त रूप से दोषी माने गए तो फिर चयन समिति के सिर्फ एक सदस्य को निलंबित किया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। यह न सिर्फ द्ववेष पूर्ण है बल्कि बैंक प्रबधंन की मनमानी भी है। जिससे इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में और लोगों को बचाने का खेल खेला जा रहा है।

इस बारे में निलंबित किये गए पूर्व महाप्रबध्ंाक रामविशाल पटैरिया ने बताया कि रजिस्ट्रार ने जो भर्ती प्रक्रिया  2 नवम्बर 2022 को जारी की थी उसमें प्रबंधकों से जानकारी एवं दस्तावेज मगांकर प्रक्रिया को चयन समिति के द्वारा पूर्ण किया जाना था। इसी के परिपालन में चयन समिति के द्वारा प्रक्रिया संपादित की गई इस प्रक्रिया में साफ निर्देश था कि किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए चयनित सूची को अनुमोदन के लिए जेआर सागर के लिए भेजा जाए और जेआर सागर ने जब अनुमोदन कर दिया उसके बाद ही भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी कौन सी प्रक्रिया होती है कि जिसमें 37 लोगों में एक भी व्यक्ति पात्र न हो। इसका मतलब है कि रजिस्ट्रार ने नियम बदल कर कहींन कहीं गलती की है। उन्होंने कहा कि अगर दो या तीन व्यक्ति गलत होते तब तो गड़बड़ी समझ में आती लेकिन क्या यह संभव है कि पूरे 37 के 37 व्यक्ति गलत हों। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में पूर्व से कार्यरत व्यक्तियों को ही लेना था। अब अगर पूरे प्रदेश में इन लोगों में कोई पात्र नहीं है तो आयुक्त महोदय स्वयं बताये कि पात्र कौन है और अगर कोई पात्र नहीं है तो फिर यह पूरी भर्ती प्रक्रिया करवाई ही क्यों गई। सहायक समिति सेवकों और विक्रेताओं को यह छूट दी गई थी कि आपके पास अनुभव है इसलिए 60 प्रतिशत भर्ती इन्हीं लोगों में से की जानी थी। उन्होंने कहा कि इन समिति सेवकों और विक्रेताओं के साथ यह बहुत बड़ा कुठाराघाट किया गया है। मेरा निलंबन तो बहुत छोटी बात है। उन्होंने कहा कि एक जेआर इस प्रक्रिया का अनुमोदन करता है जबकि दूसरा जेआर प्रक्रिया को दोष पूर्ण बताया है तो यह समझ से परे है कि पहला जेआर सही है या फिर दूसरा जेआर इसकी जांच होना चाहिए लेकिन इसके सुनवाई न करके एकतफा आदेश रद कर दिया गया जो न्याय संगत नहीं है। श्री पटैरिया ने कहा कि पदोन्नति के लिए विभाग में कोई नियम नहीं है इसलिए हमनें वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया जिसमें साफ कहा गया कि सेवा नियम लागू होने के पूर्व संचालक मण्डल सक्षम प्राधिकारी था उन्होंने जो किया उसे सही माना जाये। इसके बावजूद भी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी गई जो गलत है।
आपको बता दे कि छतरपुर सहित प्रदेश की तीन जिलों में यह भर्ती प्रक्रिया की गई थी। इसके लिए बाकायदा एक चयन समिति का गठन किया गया था और प्रबंधकों से समस्त दस्तावेज मांगे गए थे इसके बाद चयन समिति के सयुक्त निर्णय पर छतरपुर जिले के 37 सहायक प्रबंधकों को प्रबंधक पद पर भर्ती कि प्रक्रिया करके इसे अनुमोदन के लिए संयुक्त संचालक सागर को विधिवत रूप से भेजा गया था और संयुक्त संचालक सागर के द्वारा अनुमोदन प्राप्त होने के बाद ही यह प्रक्रिया संपादित की गई थी। समय समय पर इस भर्ती प्रक्रिया पर उगलियां उठाई गई और शिकायतें भी की गई। दिनांक 03 फरवरी 2023 को संयुक्त आयुक्त सहकारिया मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक सीबी-2/01/छतरपुर/2023/375 में संयुक्त आयुक्त द्वारा महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक छतरपुर को भेजे पत्र में इस प्रक्रिया के बारे में विभिन्न बिंदुओं के साथ अंत में लिखा गया था कि संभागीय संयुक्त पंजीयक सागर प्रस्ताव पेश होने के 7 दिवस में परीक्षण करेंगे और उसे उपयुक्त पाये जाने पर बैंक को नियुक्ति आदेश जारी करने हेतु प्रेसित करेंगे। इसके बाद 16 मार्च को सहकारिता आयुक्त द्वारा उपायुक्त एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी बैंक को लिखित पत्र क्रमांक 884 में स्पष्ट किया गया कि पेक्स कर्मचारियों के लिए वर्तमान में लागू सेवा नियम के पूर्व विभिन्न परिपत्रों के अनुसार पेक्स समितियों के नान केडर कर्मचारियों की भर्ती के लिए संस्था का संचालक मण्डल ही सक्षम अधिकारी है। इसके अलावा कुछ अन्य शिकायतों के निराकरण में भी यह संपूर्ण प्रक्रिया सही पाई गई और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार शिकायत कर्ताओं की शिकायतोंको प्रमाणित नहीं पाया गया। जो इस बात का घोतक है कि इस पूरी प्रक्रिया को जान बूझकर विवादित बनाकर व्यक्ति विशेष को टार्गेट कर गैर जिम्मेदाराना और अन्याय पूर्ण कार्यवाही की गई है जो विधि संगत नहीं है। अगर प्रक्रिया को दोष युक्त भी माना जाये तो कार्यवाही पूरी चयन समिति पर होना चाहिए न कि सिर्फ एक व्यक्ति पर कार्यवाही कर चयन समिति को पाक साफ साबित करने का प्रयास किया जाये।

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