शुभ न्यूज महोबा। पराली फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान से किसानों को अवगत कराने और इसके न जलाने से भूमि मे होने वाले लाभ के बावत किसानों को जागरुक किया गया। इस दौरान सोमवार को अपर जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर से प्र्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रखाना किया। वाहन सोमवार को सारा दिन अलग अलग गांव में भ्रमण कर प्रचार प्रसार करता रहा। इस मौके पर जिले के तमाम अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
गौरतलब है कि जिले में फसल कटने के बाद किसानों द्वारा अवशेष काटने के बजाए उसमे आग लगा दी जाती है। इससे खेतों की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और इसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है। किसानों को पराली न जलाने की सलाह दी गई जिससे खेतों में अधिक से अधिक पैदावार हो सके। प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाने से पहले अपर जिलाधिकारी रामप्रकाश ने कहा कि देशी खाद का प्रयोग करने से खेतों में जान बनी रहती है और हर साल खेतों में फसल का अधिक उत्पादन होता है।इस मौके पर उप निदेशक कृषि डा0 अभय कुमार सिंह यादव ने कहा कि पराली जलाने से इसके दुष्परिणाम सामने आते हैं। पर्यावण प्रदूषण पर भी इसका असर पड़ता है। कहा कि पराली जलाने की वजह से जहां एक तरफ प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है तो वहीं दूसरी तरफ इसके वजह से जमीन भी बंजर होने लगती है जमीन के बंजर होने का डायरेक्ट असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है। किसानों द्वारा हर साल पराली जलाने की वजह से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा में कमी आ रही है। इस मौके पर देवेंद्र सिंह राजपूत के अलावा तमाम किसान और कर्मचारी मौजूद रहे।

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