टीकमगढ़। करीब तीन-चार दिन चलने वाला दीपोत्सव दीपावली का पर्व आने ही वाला है जहां लोग तैयारियो में जुटे हुए हैं और इस त्यौहार को पूरी उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है जिसे लक्ष्मी का पर्व भी कहते हैं दीपावली के दिन लोगों के घर-घर में धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा बड़े ही विधि विधान से की जाती है और यह पर्व मनाया जाता है। हिंदू त्योहारों की परंपरा में यह बड़ा ही महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है जो पूरे वर्ष में एक ही बार पूरे भारतवर्ष में एक साथ मनाया जाता है और इस त्यौहार के आने के महीनों पूर्व से ही लोग इस पर्व की तैयारियों में जुट जाते हैं जहां घरों,दुकानों में साफ सफाई रंगाई- पुताई आदि कार्य भी किए जाते हैं और दीपावली के दिन पूरे साफ सुथरे तरीके से यह पूजा पाठ की जाती है और धन के देवता कुबेर एवं माता लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है। बाजार में भी दीपावली पर्व को लेकर रौनक दिखने लगी है जहां व्यापारियों ने दुकानों को आकर्षक ढंग से सजाया है और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह की प्रतिष्ठानों में साज सज्जा भी की है वहीं दियो की भी बिक्री होने लगी है और नगर के प्रमुख चौराहों पर दीपावली पर्व को लेकर दियों की दुकाने भी सज गई है जहां मिट्टी के दिये और अन्य पूजन का सामान भी दिखने लगा है।,,,,,,,,, महंगाई की मार,,,,,,, त्योहार कोई भी हो उसे मनाने की जो परंपरा चली आ रही है वह तो मनाया ही जाता है चाहे परिस्थितियां कुछ भी हों लेकिन त्योहार को मनाने के लिए लोगों को व्यवस्थाएं जुटाना ही पड़ती हैं। चाहे त्यौहार हो या चाहे आम दिन हों आजकल महंगाई अपने चरम पर है और सब्जियों, फलों ,मिठाई ,किराना आदि की वस्तुएं अपने भावों को लेकर आसमान छू रही हैं जहां आम मजदूर और आम जनों को दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करना एवं सब्जी खरीदना भी मुश्किल पड़ रहा है क्योंकि सब्जियां और खान-पान की वस्तुओं में इतनी महंगाई है कि आम आदमी की तो कमर ही टूट रही है लेकिन शासन प्रशासन इस और उतना सजग दिखाई नहीं देता जितना की होना चाहिए आमजन के हिसाब से इस महंगाई की मार झेलना बहुत ही मुश्किल है जहां खास तौर से सब्जियों, फलों और खान-पान की वस्तुओं की कीमतें अपने आप में उछाल पर उछाल ले रही हैं। ------किसान की हालत------ पिछले सालों से किसान उर्दू, सोयाबीन आदि की फसलों से टूटता आ रहा था जहां बारिश होने के चलते यह फसले नष्ट हो जाती थीं जिसको ज्यादातर ना बोकर किसानों ने इस वर्ष
जिले में मूंगफली की ज्यादातर खेती की थी जिसकी पैदावार अच्छी तो हुई है लेकिन उसके भावों पर ग्रहण लग गया है मूंगफली का भाव 30, 35 और 40 रुपए प्रति किलो से ज्यादा नहीं है जिसको लेकर भी किसान निराश हो गए हैं अगर किसान फसल भी उगाऐ तो उसके भाव उसे दुखी कर देते हैं और जो फसल कुदरत के कहर से बर्बाद हो जाती थी उसके भाव कहीं इस फसल से दो गुना रहते थे कुछ किसानों का तो यह भी कहना है कि मूंगफली भी बोई लेकिन उसके भाव सुनकर मन दुखी हो गया। अब त्यौहार है तो वह तो मनना ही है चाहे जैसी भी परिस्थिति हो।........जनअपील....... समाचार यह जान अपील कर रहा है कि दीपावली के त्योहार पर ज्यादातर मिट्टी उत्पाद से बने दिये का ही प्रयोग करें और मिट्टी के ही दीपक खरीदें जिससे कि स्थानीय उन मिट्टी के कारीगरों को उसका लाभ मिल सके और उनका रोजगार चल सके।......आतिशबाजी भी कम करें और संभल कर करें....... वैसे तो दीपावली पर्व दीपोत्सव का पर्व होता है जहां घर-घर में दिये की रोशनी से घर के आंगन और कोने-कोने जगमगा जाते हैं लेकिन आतिशबाजी भी इस त्यौहार में लोग सम्मिलित करते है जहां आतिशबाजी पटाखे आदि फोड़े जाते हैं लेकिन इस आतिशबाजी मे बच्चों को इससे दूर रखें और अगर बच्चे आतिशबाजी कर रहे हों तो उनके पास ही रहें एवं हो सके तो कम से कम आतिशबाजी करें क्योंकि इसके धुएं से जन जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ता है और इसके दुष्परिणाम भी निकलते हैं आतिसबाजी से कहीं आग लगने का भी डर बना रहता है जिससे कि अप्रिय घटनाएं भी हो सकती हैं जिसको लेकर आतिशबाजी कम से कम करें और संभलकर करें। उल्लेखनीय है कि वर्ष का वडा़ त्योहार दीपोत्सव दीपावली का पर्व आगामी 31 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा जिसको लेकर तमाम तैयारियां लोगों ने की है और इसकी पूजा अर्चना को लेकर तमाम व्यवस्थाएं की जा रही है जहां बाजारों में भी इस पर्व को लेकर रौनक नजर आने लगी है वही 29 अक्टूबर 2024 को छोटी दीपावली यानि कि धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा और दीपावली पर्व की श्रृंखला में जुडे़ आगामी पर्व गोवर्धन पूजा, भाई दूज की पूजा इत्यादि त्यौहार भी इसी पर्व की श्रृंखला में सम्मिलित हैं जो आगामी दिनों में मनाए

