0 श्रीनगर के रामलीला मैदान में चल रही लीला के दूसरे दिन दर्शकों की जुटी भीड़
शुभ न्यूज महोबा। युवक रामलीला मंडल श्रीनगर द्वारा आयोजित रामलीला के दूसरे दिन मुनि विश्मामित्र द्वारा श्रीराम सहित चारो भाइयों को शिक्षा ग्रहण कराने के लिए आश्रम ले जाने और ताड़का वध, मारीच सुबाहु का श्रीराम से संवाद और युद्ध की लीला का कलाकारों द्वारा मंचन किया गया। रामलीला देखने के लिए दर्शकों से मैदान समाप्ति तक भरा रहा। तड़का वध होते ही दर्शकों द्वारा जय श्रीराम के नारों से रामलीला मैदान गूंज उठा।
श्रीनगर किले के पास बने रामलीला मंच पर सोमवार की रात कलाकारों द्वारा दिखाई गई रामलीला में राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न को गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने को भेजा जाता है जहां पर उन्होंने “गुरु ग्रह पढ़न चले रघुराई अल्पकाल विद्या सब पाई“ यानी बहुत ही कम समय में शिक्षा से पारंगत हो गए। गुरु आश्रम से अभी आए ही थे की यज्ञ रक्षा के लिए मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ से राम लक्ष्मण को लेने के लिए आते, लेकिन पिता प्रेम के चलते पहले तो राजा दशरथ ने आना कानी की लेकिन मुनि विश्वामित्र का क्रोध देखकर वशिष्ठ जी ने राजा को समझ कर देश हित के लिए राम लक्ष्मण को भेजन के लिए कहते हं, जिस पर राजा दशरथ ने मुनि विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण को भेज देते हैं।
वन के रास्ते में दुष्ट ताड़का का साम्राज्य मेला जहां पर मुनि विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम ताड़का का एक ही बाण में संहार कर देते है। ताड़का का वध होते ही दर्शन तालियों और जय श्रीराम के नारे लगाते हुए कलाकारों का उत्साह वर्द्धन करते हैं। इसके बाद कलाकारों द्वारा मारीच सुबाहु दरवार में दूत द्वारा शराबी, खानसामा, और नृतकी को बुलाकर नाच गाना किया और बाद में मारीच सुबाहु का भी श्रीराम से संवाद और युद्ध का मंचन किया गया। राम की भूमिका समर्थ तिवारी, लक्ष्मण की भूमिका मन्नय तिवारी, ताड़का पप्पू विश्वकर्मा, मुनि विश्वामित्र अनूप त्रिवेदी, वशिष्ठ जी हरिश्चंद्र शर्मा मारीच सुबोध गंगेले, सुबाहु अरविंद तिवारी, दूत प्यारेलाल श्रीवास, राजा दशरथ भूपेंद्र रिछारिया व्यास की भूमिका रतीश रावत आदि ने अभिनय किया। रामलीला का संचालन अनिल शुक्ला ने किया तथा व्यवस्था सहयोगी अखिल यशवर्धन त्रिवेदी, प्रकाश कुशवाहा आदि रहे।
