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कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले का कंस वध के साथ हुआ समापन

 



0 मेले में महिलाओं ने श्रृंगार और घरेलू सामान खरीदे तो बच्चों ने झूले का लिया आनंद
धर्मेंद्र शुभ न्यूज महोबा। कस्बा जैतपुर में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले कंस वध पठवा मेले का कंस वध के साथ समापन किया गया। कंस वध होते ही लोगों द्वारा लगाए गए जय श्रीकृष्ण और बलराम के जयकारों से मेला परिसर गूंज उठा। मेले में हजारों ग्रामीणों की भीड़ मौजूद रही, जिन्होंने मेले का खूब आनंद लिया। जहां महिलाओं ने दुकानों से घरेलू सामन खरीदा तो बच्चों ने भी झूला झूलकर खेल खिलौने खरीदे।
रेलवे स्टेशन जैतपुर रोड पर कर्तिक पूर्णिमा पर एक दिवसीय कंस वध पठवा मेले का आयोजन ब्रिटिश शासन से होता चला रहा है। इस ऐतिहासिक मेले में कस्बे के अलावा आसपास के क्षेत्रों व ग्रामीण अंचलों से लोगों की भीड़ ट्रैक्टर व अन्य वाहनों पर सवार होकर पहुंची। मेले में क्षेत्र और आसपास के दुकानदारों ने सुबह से ही अपनी दुकानों को तैयार कर लिया और दोपहर होते ही बिक्री शुरू हो गई। मेले में पुरूषों के साथ साथ महिलाओं और बच्चों की खासी भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने मेले में लगी दुकानों से श्रृंगार, साज सज्जा और घरेलू सामान की जमकर खरीददारी की तो वहीं बच्चों ने झूलों का आनंद लिया। इस दफा महिलाओं की सबसे ज्यादा भीड़ चुड़ियों की दुकान पर नजर आई और जमकर चूड़ियों की खरीददारी की, जिससे दुकानदार भी खासे गदगद नजर आए।
मेले में सुबह से शाम तक लोगों की खासी भीड़ जुटी रही और सांयकाल होते ही कंस वध कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें श्याम बलराम द्वारा बग्घी पर बैकर कंस वध की भरपूर प्रयास किया तो वहीं ग्रामीण हो हल्ला और पटाखे दागकर बग्घी के घोड़े को कंस के पुतले तक ले जाने की कोशिश में लगे रहे। एक घंटे की मशक्कत के बाद श्याम कंस के पुतले को खींच लाते हैं और बलराम के साथ कंस का वध करते हैं। कंस का वध होते ही लोग श्याम और बलराम के जयकारे लगाते हैं, जिससे पूरा मेला मैदान श्रीकृष्ण की भक्ति में सरावोर नजर आने लगता है और कंस वध के साथ मेले का समापन होता है।
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कंस वध में हाथी न आने से ग्रामीणों में छायी मायूसी
गौरतबल है कि विगत वर्षों से श्याम और बलराम हाथी पर सवार होकर कंस का वध करते थे, जो आकर्षण का केंद्र होता था, लेकिन इस साल हाथी का इंतजाम न होने से ग्रामीणों खासी मायूसी नजर आई। हाथी न आने के संबन्ध में मेले के आयोजक महंत बल्देव प्रसाद का कहना है कि हाथी मालिक द्वारा अधिक पैसा मांगे जाने के कारण इस साल कंस वध के लिए हाथी नहीं आ सका। बावजूद इसके श्याम बलराम के विजय जुलूस व झांसी के इंतजाम में कोई कसर नहीं छोडी गई और धूमधाम के साथ झांकियां निकाली गई। बताया कि इस ऐतिहासिक मेले के लिए शासन द्वारा कोई मदद नहीं जाती है, श्रद्धालुओं के सहयोग से ही मेले का आयोजन होता है लेकिन अगले साल मेले में आयोजित सभी कार्यक्रमों को भव्य रूप देने की कोशिश की जाएगी।
 


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