0 वीरांगना झलकारी बाई जयंती की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
शुभ न्यूज महोबा। स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम द्वीपशिखा वीरांगना झलकारी बाई जयंती की पूर्व संध्या पर डा0 एलसी अनुरागी के आवास पर गुरुवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वीरांगना की वीरता पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला साथ ही कवि और रचनाकारों ने रचनाओं के माध्यम से झलकारी बाई को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष ईरेंद्र बाबू तथा कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी रहे।
गोष्ठी की शुरूआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और वीरांगना झलकारी बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई, इसके बाद जीतेंद्र आदित्य ने सरस्वती वंदना शारदे मां शारदे बुद्धि का भंडार दे प्रस्तुत की साथ ही वीरांगना पर रचना पढ़ी कि एक हिम्मत वाली बेटी का अंदाज बहुत ही न्यारा था, दुर्गादल की वीरांगना ने गोरो को ललकारा था। वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र वर्मा ने रचना सुनाते हुए कहा कि झलकारी की बहादुरी पर हर बुंदेलखंडी को है नाज, पुरुष से भी ऊंचा हो गया नारी समाज। कवि सुभाष चौरसिया ने रचना सुनाई कि बुंदेले हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी, रानी झांसी की दाय हाथ थी झलकारी। पं0 हरीशंकर नायक की रचना झलकारी उतरी रणभूमि में जब, गोरे थर थर कांप गए को खूब सराहा गया। थी। कवि विदेश विद्यासन ने कहा कि वीरो की वीरांगना झलकारी बाई सतय निष्ठा कर्तव्य निभाते हुए लड़ाई लड़ी थी। लखनलाल चौरसिया ने कहा कि आज सभी परिवारों में क्यो बोझ बनी है बेटियां राम रहीम कहां सेमिलते होती जो बेटियां।
पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई की गाथा सदियो तक गाई जाएगी। कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थी। वीरांगना की शख्सीयत ही ऐसी थी कि युद्ध के समय दुश्मन पर जय भवानी कहते हुए टूट पड़ती थी। साहित्यकार प्रमोद सक्सेना की रचना कर में ले तलवार समर में लड़ती रही अकेली, रानी लक्ष्मीबाई की झलकारी थी सहेली को खूब पसंद किया गया। पूर्व प्रोफसर डा0 एलसी अनुरागी ने कहा कि रचना सुनाई कि झलकारी विश्वविद्यालय खुलाने, बिटियन खां खूब पढ़ाने है, जनज न खां समझाने है। शिक्षक योगेंद्र अनुरागी ने बुंदेलखंड की शान जिसने दी चिंगारी थी रानी की सखी सहेली वीरांगना झलकारी थी। कहा कि वीरांगना इतिहास के पन्नों में लुप्त एक महान दलित महिला योद्धा थी, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम दौरान बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। झलकारी बाई केवल अपनी दृढ़ता और साहस से प्रेरित थी और आगे चलकर महिला योद्धा बनी। गोष्ठी में विश्वजीत अनुरागी, सुनीता अनुरागी, ईरंद्र बाबू, जगदीश यादव ने भी बेटियों की शिक्षित बनाए जाने के प्रति अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कुंवर बहादुर, विपिन घनघौरिया, शिवविजय, सुमित उमाशंकर आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डा0 एलसी अनुरागी ने किया और अंत में सभी अतिथियों का अभार व्यक्त किया।

