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करीब 32 वर्षीय किसान ने फांसी लगाकर की खुदकुशी मामला ग्राम पंचायत केशवगढ़ का, मात्र 40 डिसमिल जमीन का बताया जा रहा विवाद


टीकमगढ़। जतारा जनपद एवं मोहनगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत केशवगढ़ में एक करीब 32 वर्षीय किसान ने पेड़ पर रस्सी का फंदा लगाकर अपनी अंहम लीला समाप्त कर ली है बताया गया कि यह किसान अपनी जमीन के विवाद को लेकर परेशान था जहां मात्र 40 डिसमिल जमीन का मामला था और इसका विवाद अभी फिलहाल कुछ बीते ही दिनों से चल रहा था 22 दिसंबर 2024 की सुबह जब लोगों ने इस किसान को पेड़ पर लटका देखा तब इसकी सनसनी फैल गई और पुलिस को भी सूचना दी गई सूत्रों के बताए अनुसार इसने कुछ जमीन खरीदी थी जिस पर कुछ लोग कब्जा किए हुए थे जब इस किसान ने कब्जा छोड़ने को कहा तो कब्जाधारियों ने उसकी जमीन का कब्जा नहीं छोड़ा जिसके चलते वह पीड़ित किसान इतना परेशान था कि वह अपनी सूझबूझ खो बैठा और पेड़ पर फांसी

लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत केशवगढ़ निवासी किसान अखिल यादव जो कि अपने जमीनी विवाद को लेकर परेशान चल रहा था बताया गया कि पीड़ित किसान ने अपने इस जमीन विवाद की शिकायत मोहनगढ़ थाना में भी दर्ज कराई थी लेकिन शायद समय रहते इस ओर कुछ कार्यवाही ना हो पाने के कारण वह परेशान हो गया और उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया जैसे ही इसकी जानकारी मोहनगढ़ थाना पुलिस को लगी तो मौके पर पुलिस ने पहुंचकर शव को अपने कब्जे में किया और पंचनामा पीएम आदि की कार्यवाही शुरू कर दी। बताया गया कि मृतक की जेव में एक कागज भी मिला है जिसमें लिखा हुआ है कि इन लोगों के कारण मैं फांसी लगाई है इस कागज पर करीब दर्जन भर लोगों के नाम दर्ज हैं जिस कागज को पुलिस ने अपने पास जप्त कर मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया गया कि मृतक के दो छोटे बच्चे और पत्नि भी है जहां उनका रो-रो कर बुरा हाल है। हालाकि सूचना के पश्चात मौके पर पहुंची पुलिस ने पूरा मामला जांच पड़ताल में लिया है और पुलिस मामले की कार्रवाई में जुट गई है और पुलिस पता लग रही है। उल्लेखनीय है कि जहां एक और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश शासन के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव किसानों की शान और उनके सम्मान के लिए दिन-रात एक कर काम कर रहे हैं और उन्हें पूरी तरह से आगे बढा़कर विकासशील बनाने मे जुटे हुए हैं वहीं दूसरी ओर किसानों के साथ इस प्रकार की घटनाएं हो रही है जहां ऐसे मामलों को देखकर और सुनकर ऐसा प्रतीत होता है कि संबधित प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी ऐसे मामलों में गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं।


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