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अगहन मास की पूर्णिमा पर धार्मिक अनुष्ठान से 32 पूर्णिमाओं का मिलता पुन्यफल



0 श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव और रामधुन के साथ लगाई गोरखगिरि की परिक्रमा
शुभ न्यूज महोबा। अगहन मास की पूर्णिमा पर रविवार की तड़के गुरू गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में श्रद्धालुओं ने बुंदेलखंड के ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा श्रद्धा भक्ति भाव राम धुन और गुरू गोरखनाथ के जयकारों के साथ निकाली। सर्द मौसम होने के बाद भी परिक्रमा के प्रति श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। परिक्रमा दौरान मार्ग पर पड़ने वाले सभी प्राचीन मंदिरों में भक्तों द्वारा शीश झुकाकर सुख सवृद्धि की प्राथनाएं की गई। परिक्रमा समाप्ति के बाद शिव मंदिर परिसर में गोष्ठी का आयोजन किया गया, जहां पर अगहन मास (मार्ग शीर्ष) पर दान व्रत व धार्मिक अनुष्ठान करने से मिलने वाले पुन्य पर प्रकाश डाला गया।
गोरखगिरि परिक्रमा शिवमंदिर से रामधुन के साथ आरम्भ हुई जो पठवा के बाल हनुमान मंदिर, रामजानकी मंदिर, कबीर आश्रम, बाबा हाजी फिरोजशाह की दरगाह, संकरे सन्या, काली माता, छोटी चंद्रिका माता से होते हुए राम दरबार मंदिर पुलिस लाइन, नागौरिया मंदिर, बाला जी मंदिर, कालभैरव मंदिर होते हुए पुनः शिव मंदिर में आकर संपन्न हुई। इसके बाद गोष्ठी का आयोजन समिति के प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। गोष्ठी पूर्व प्रवक्ता डा0 अनुरागी ने मार्ग शीर्ष यानी अगहन मास की पूर्णिमा के पुन्य फल का वर्णन करते हुए कहा कि इस पूर्णिमा में व्रत दान परिक्रमा आदि करने से 32 पूर्णिमाओं का पुन्यफल प्राप्त होता है। इसी पूर्णिमा को विष्णु भगवान ने मत्स्य अवतार लिया था, देवी पार्वती ने अन्नपूर्ण का रूप धारण, ऋषि कश्यप् ने कश्मीर की रचना की थी और अत्रि ऋषि व देवी अनसुइया के घर दत्तात्रेय भगवान ने जन्म लिया था। बताया कि दत्तात्रेय ने राजा अर्क, भक्त प्रहलाद, राजा कार्टवीय, परसुराम व गुरू गोरखनाथ को ज्ञान भक्ति व योग की शिक्षा दी थी। भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरू जिनमें पृथ्वी, वायु, आकाश, जल अग्नि चंद्रमा सूर्य समुद्र, कबूतर अजगर कीट पतंग, मधुमक्खी, हाथी शहद निकालने वाला हरिण मछली पिंगला वैश्या कुरर पक्षी नालक आदि शामिल हैं।
गोष्ठी में पंडित अवधेश तिवारी ने श्रीमद् भागवत गीता के दसवे अध्याय का 35वां श्लोक सुनाते हुए कहा कि बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छंदसामहम, मासानां मार्ग शीर्षे अहमृतूनां कुसुमाकरः। अर्थात् भगवान कृष्ण कहते हैं कि मैं सामवेद के गीतों में बृहत्साम हूं छंदो में गायत्री हूं महीनों में मार्गशीष यानी अगहन हूं तथा ऋतुओं में बसंत ऋतु हूं। अधिवक्ता सुनीता ने वाल्मीकि रामायण के भगवान राम के आदर्श चरित्र वाले श्लोक सुनाएं। इस मौके पर अधिवक्ता मुन्नालाल धुरिया बैंक कर्मचारी राजाभैया पंडित हरीशंकर नायक गौरीशंकर कोष्ठा, छेदालाल चौरसिया चंद्रभान श्रीवास बहादुर अनुग एडवोकेट पप्पू सैन परसुराम अनुरागी, ओम प्रकाश साहू, जगदीशचंद्र संत श्यामा महाराज महेश कुशवाहा सहित तमाम भक्त मौजूद रहे। अंत में प्रसाद वितरण करते हुए गोष्ठी का समापन किया गया।


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