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झूठ बोल रहा है तो बोलने दो उसे वो दुकानदर है कोई इमाम थोडी है.........



आल इंडिया मुशायरा में नामीगिरामी शायरों ने पूरी रात श्रोताओं को अपने कलाम से जगाए रखा
महोबा। नगर चरखारी में चल रहे गोवर्धन्नाथ जू मेला में आल इंडिया मुशायरा की महफिल सजाई गई। नामीगिरामी शायरों ने मुशायरा में शिरकत कर चार चांद लगाते हुए अपने कलाम गजल और शायरी के जरिए दर्शकों का पूरी रात मनोरंजन कर जगाए रखा। मुशायरा का शुभारंभ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष शोभालाल यादव ने शमा जताते हुए की। मुशायरा सुनने के लिए नगर के अलावा जिले के तमाम शायरी के शौकीनों ने शिरकत करते हुए रात तीन बजे तक मुशायरे की महफिल में शामिल रहे। देश विदेश में अपने कलाम को पेश करने वाले जौहर कानपुरी ने शायरी पेश करते हुए कहा कि चमन में सबके लिए ऐतमाद थोड़ी है तेरा निजाम खुदा का निजाम थोड़ी है। वो झूठ बोल रहा है तो बोलने दो उसे दुकानदर है कोई इमाम थोडी है।
मुशायरा में शायर जाकिर हुसैन शायरी ने सुनाई कि रोटी के लिए जर्फ का सौदा नहीं करते पेश की। महोबा से आए शायर हफीज कमाल बैचेनिया ने सुनाया कि गजल में कुछ मुस्तरिफ सी आहें पढ़ लेना मेरे गम की रानाईयां गजल में’ आसानियों से सबकी आती नहीं समझ में होती है कुछ ज्यादा गहराईयां गजल मे। सुर की मलिका मनिका दुबे ने गीत प्रस्तुत किया कि बिना सोचे ये कसमें तोड़ देना, कलाई आसरे की मोड़ देना। खुशी में आपकी अड़चन बनूं तो उसी पल आप मुझको छोड़ देना को खूब सराहा गया। सबा बलरामपुरी  शेर पुरअम्न जिन्दगी की हिमायत किया करो’ नफरत भरी बला है मोहब्बत किया करो, जिसे सुन श्रोता तालिया बजाने को मजबूर हो गए। अन्तराष्ट्रीय मंचों एक ओर मशहूर शायर हाशिम फिरोजाबादी ने गजल सुनाते हुए कहा कि जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए। इसके बाद निजाम कर रहे अबरार कासिफ ने अपनी मशहूर गजल मेरे रब की मुझ पर इनायत हुई कहूं भी तो कैसे इबादत हुई। हकीकत हुई जैसे मुझ पर अयां अलम बन गया है खुदा की जुबां। हास्य और व्यंग के शायरा सज्जाद झंजट और जहाज देवबंदी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और वाहवाही लूटी। 


मुशायरे की महफिल को सजाते हुए शायर नईम अख्तर तराना ने शेर सुनाते हुए कहा कि अच्छा ये खेल तुमने किया खेल खेल में’ माचिस की तीली फेंक दी मिटटी के तेल में पढ़ते हुए श्रोताओं को मंच से जोड़ा और उसके बाद शेर और गजलों से मुशायरा का समापन किया। मुशायरे की फहरिश्त मे जौहर कानपुरी को जूनियर शायरों पहले पढ़ाने पर उनकी नाराजगी देखने को मिली हालांकि आयोजकों के गुजारिश पर उन्होंने अपने नए व पुराने कलाम पेश किए। मुशायरा की अध्यक्षता नबी अहमद खां ने की और इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि रामपाल कुशवाहा रमजान सौदागर नसीम दुर्रानी सईद खान फोरमेन परवेज संजीत कुमार सौरभ सक्सेना सहित सैकड़ां की संख्या में महिला पुरूष मौजूद रहे। अंत में कार्यक्रम के संयोजक मुबारक हुसैन ने सभी मेहमानों शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।



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