0 मजार पर चादर चढ़ाने के बाद लोगों ने अमन चैनकी मांगी दुआएं
महोबा। हजरत निजामुद्दीन औलिया का तीन दिवसीय सालाना उर्स पर अकीदतमंदों द्वारा चादर जुलूस निकाला गया। माजर पर फातिहा के बाद लोगों ने अमन चैन की दुआएं मांगी और आए हुए लोगों को तवर्रूख बांटा गया। उर्स के मौके पर पुरूषों के साथ साथ महिलाओं की खासी भीड़ नजर आई, जिन्होंने मजार पर फूल इत्र चढ़ाकर मन्नते मांगी। उर्स के मौके पर कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कव्वालों ने अपने कव्वालियां सुनाकर सूफीयाना माहौल बना दिया।
हजरत निजामुद्दीन औलिया मजार के उर्स पर अकीदतमंदों द्वारा धूमधाम के साथ चादर जुलूस निकाला गया। चादर जुलूस दौरान डीजे पर नातिया कलाम बज रहे थे साथ में बिजली के आकर्षक झूमरों की रोशनी से चादर जुलूस सराबोर रहा। चादर जुलूस में भारी संख्या में लोग नरा ए तकबीर अल्लाह हो अक्बर की सदाए बुलंद करते हुए चल रहे थे। मजार पर जैसे ही चादर जुलूस पहुंची तो जोरदार तरीके से नारे लगाकर लोगों ने चादर को सिर से लगाया और मजार पर चादर चढ़ाई। एक के बाद एक चादर चढ़ाने का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। चादर चढ़ाने के बाद हाफिज और मौलानाओं ने फातिहा पढ़ी और इसके बाद सभी ने दुआएं की।
मजार पर चादर चढ़ाने के बाद सूफियाना कव्वालियों का सिलसिला शुरु हुआ जो देर रात तक चलता रहा। यहां पर मौदहा कम्हरिया के नामी गिरामी कव्वालों ने शिरकत की, सूफियाना कव्वालियां का बुर्जुगों ने देर रात तक लुत्फ उठाया। कव्वाली सुनने के लिए पुरुषों के अलावा महिलाओं की भीड़ जुटी। रविवार की सुबह मजार ए अकदस पर कुरान ख्वानी का आयोजन किया गया, जहां पर भारी संख्या में लोगों ने पहुंचकर कुरान ख्वानी में हिस्सा लेकर कुरान पढ़ा। कुरान ख्वानी खत्म होने के बाद सभी को तबर्रुख वितरित किया गया। दोपहर दो बजे मजार प्रांगण में उर्स का आयोजन किया गया, जहां पर लोगों ने देगे तैयार कराकर मजार पर आए हुए लोगों को तबर्रुख वितरित किया और तमाम लोगों को आस्थाना परिसर में बिरयानी, दालचा, जर्दा खिलाया गया।


