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मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने गोरखगिरि परिक्रमा मंदिरों मे टेका माथा



0 गोरखगिरि की परिक्रमा चित्रकूट के कामदगिरि की परिक्रमा के लगभग बराबर
शुभ न्यूज महोबा। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकार के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने बुधवार को मौनी आमावस्या पर गोरिखगिरि परिक्रमा लगाई। पांच किमी0 लंबी पैदल परिक्रमा दौरान श्रद्धालुओं ने मार्ग पर पड़ने वाले हजारों वर्ष पुराने मंदिरों में मत्था टेंक कर प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रार्थना की। शिवतांडव मंदिर से प्रारंभ हुई परिक्रमा में श्रद्धालुओं ओम नमः शिवायः के जयकारों के साथ भक्ति में लीन होकर चल रहे थे।
गुरू गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखगिरि में परिक्रमा शिव तांडव मंदिर से बुधवार की सुबह प्रारंभ हुई, जो महावीरन, पठवा के हनुमान, कबीर आश्रम, सकरे सन्या, भूतनाथ आश्रम, काली माता, खो खो माता, शनिदेव, राम दरबार, छोटी चंडिका, पुलिस लाइन, नागौरिया, काल भैरव होते हुए वापस शिवतांडव मंदिर में पहुंचकर संपन्न हुई। परिक्रमा संपन्न होने के बाद बुंदेली समाज के संयोजक ने बताया कि 144 साल बाद प्रयागराज में जो महाकुंभ हो रहा है, वह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। महाकुंभ पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं और महाकुंभ से हर भारतीय की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि गोरखगिरि की परिक्रमा चित्रकूट के कामदगिरि की परिक्रमा के लगभग बराबर है। कहा कि इसी पर्वत पर चौदह वर्ष के वनवास काल के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण व माता जानकी ने कुछ समय बिताया था, जिसका रामकुंड, सीता रसोई प्रमाण हैं। इस मौके पर अवधेश गुप्ता, डा0 देवेंद्र पुरवार, मुन्ना जैन, गया प्रसाद, सिद्धे, राम किशन सेन, अजय मिश्र, प्रेम, अजय, जागेश्वर, प्रवीण चौरसिया, अमित, प्रहलाद पुरवार, जगभाग सिंह, सत्येन्द्र गुप्ता, गौरव शर्मा, नवनीत मिश्र, प्रवीण श्रीवास्तव, ओम प्रकाश व महेंद्र सोनी समेत तमाम लोग मौजूद रहे।




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