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हजरत अली यौम-ए-पैदाइश पर तकरीर का किया गया प्रोग्राम



0 बच्चों की नात शरीफ सुन लोगों ने जमकर किया मुसाफा
शुभ न्यूज महोबा। शहर के मोहल्ला चौसियापुरा में मौला ए कायनात हजरत अली की यौम-ए-विलादत पर एक जलसे का अहतिममा किया गया, जिसमें शहर काजी कारी आफाक हुसैन व हाफिज कारी मुअज्जम साबरी रामपुर द्वारा हजरत अली शेरे खुदा तकरीर की गई। कार्यक्रम में तमाम लोग मौजूद रहे, जिन्होंने देर रात तक तकरीर को सुना। तकरीर में बच्चों द्वारा सुनाई गई नात शरीफ का उपस्थित लोगों ने जमकर तारीफ की और मुसाफा भी किया। 


तकरीर करते हुए शहर काजी कारी आफाक हुसैन ने कहा कि हज़रत अली की जिंदगी मक्का के काबा में जन्मे हज़रत अली पैगम्बर मुहम्मद के चचाजाद भाई और दामाद थे जो कालांतर में मुसलमानों के खलीफा बने। इसके अलावा उन्हें पहला मुस्लिम वैज्ञानिक भी माना जाता है जिन्होंने वैज्ञानिक जानकारियों को आम भाषा में और रोचक तरीके से आम लोगों तक पहुंचाया था। हजरत अली को शेर-ए-खदा, मश्किल शेरावना और समिकल कशा जैसी उपाधियां दी गई। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब ने उनके बारे में कहा था कि मैं इल्म का शहर हूं अली उसके दरवाजे हैं और मैं जिसका मौला हूं अली भी उसके मौला हैं। कहा कि मौला अली ने कुबूल किया जो नबी की बारगाह का मकबूल हुआ और जो मौला अली से अलग हुआ वो नबी की बारगाह से मरदूद हुआ। नबी की नींद पर नमाज-ए-असर कुर्बान कर दिया और नबी ने उनकी नमाज को अदा करने के लिए डूबा हुआ सूरज वापस किया।


हाफिज कारी मुअज्जम साबरी ने तकरीर में कहा कि हजरत अली का मर्तबा बुलंद है उनका जन्म अल्लाह के घर खाना-ए-काबा में हुआ था। शेरे खुदा हजरत अली ने अपने खिलाफत में समाज को इतना मजबूत बनाया कि हर फर्द अपना हक मांग सकता था। हजरत अली ने इस जमीन पर सबसे पहले हबीबे खुदा के चेहरे मुबारक की जियारत की। हजरत अली को इस्लाम में शेरे खुदा का लक्ब मिला। हक मांगने वाले की फरियाद सीधे खलीफा के पास पहुंचे इस तरह प्रशासनिक व्यवस्था उन्होंने बनाई थी। हजरत अली की सुजाअत और इंसाफ कयामत तक याद किए जाएंगे। तकरीर के मौके पर हयात रजा, मोहम्मद शाहवाज रजा ने अली की शान में बेहतर नात पढ़कर लोगो की वाहवाही लूटी तो वहीं हाफिज तबरेज ने भी कुरान की तिलावत की गई। इस मौके पर मौजूद लोगो को अंडे चाय, बिरयानी और मिठाई भी वितरित की गई। कार्यक्रम में फहीम उद्दीन, इरशाद अली, अफजाल अहमद, जाहिद अली, इशरत अली, नौशाद अली, नियाज अली, मुबीन अली, आमिल उद्दीन, सैयद तामीर उद्दीन, अलकाफ अहमद, शेख मुईन, शेख मुकीम, रिजवान, साजिद, वहीद उल्ला, रमजानी सहित तमाम कमेटी के लोग मौजूद रहे।




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