छतरपुर। कलेक्टर को कई बार आवेदन देते चुके सटई तहसील क्षेत्र के किसान अब आक्रोशित हो गए हैं। सोमवार को लगभग ढाई सैकड़ा किसानों ने कलेक्टर कार्यालय में धरना देकर अपनी जमीनों का उचित मुआवजा दिलाए जाने की मांग उठाई। मामला नैगुवां तालाब लघु सिंचाई परियोजना का है, जिसमें सैकड़ों किसानों की जमीनें अधिग्रहीत की गई हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार उन्हें जमीनों के बदले उचित मुआवजा नहीं दे रही है, जिससे उनके सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा। किसान राजेन्द्र पटेल ने बताया कि नैगुवां तालाब लघु सिंचाई परियोजना में ग्राम सिलावट, सटई, बछरौनियां, नैगुवां, पड़रिया और कदवां के लगभग 5 सैकड़ा किसानों की जमीनें अधिग्रहीत की गई हैं। प्रभावित किसानों को शासन द्वारा 3 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जा रहा है, जो कि बेहद कम है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन 3 लाख रुपए में उतनी ही जमीन हमें किसी अन्य स्थान पर दिला दे तो वे यह समझौता करने को तैयार हैं अन्यथा किसानों को 10 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। उल्लेखनीय है कि लगभग ढाई सैकड़ा प्रभावित किसान सोमवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए थे और शाम 4 बजे तक नारेबाजी करते रहे लेकिन कलेक्टर किसानों से मिलन नहीं पहुंचे, जिससे किसानों की नाराजगी और बढ़ गई है। इस बीच अपर कलेक्टर जीएस पटेल और राजनगर एसडीएम बलवीर रमण किसानों से बात करने पहुंचे लेकिन किसान कलेक्टर से बात करने की जिद पर अड़े रहे। बाद में एडीएम मिलिंद नागदेवे द्वारा एक-दो दिन में समस्या का समाधान कराए जाने के आश्वासन पर किसान शांत हुए। प्रदर्शन करने वालों में अजय दुबे, सिलावट के उपसरपंच जीतेन्द्र सिंह पटेल, सटई निवासी छिकौंड़ी पटेल, परमलाल पटेल, बालादीन अनुरागी, रामप्रसाद अनुरागी, रमेश पटेल, बिलई साहू, शारदा प्रसाद कुशवाहा, रविन्द्र सिंह, रामअवतार शुक्ला, हरदास कुशवाहा सहित सैकड़ों किसान शामिल रहे।

