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रामजन्म, ताड़का वध और पुष्प वाटिका कथा कथा सुना श्रोता हुआ भाव विभाग



0 ग्राम बसौठ में आयोजित रामचरित मानस में श्रोताओं ने किया प्रभु श्रीराम की कथा का रसपान
शुभ न्यज महोबा। विकासखंड चरखारी क्षेत्र के ग्राम बसौठ में चल रहे मानस सम्मेलन के मंच पर संगीताचार्य जगप्रसाद तिवारी द्वारा रामचरित मानस के आधार पर राम जन्म, ताड़का वध और पुष्प वाटिका कथा का मंचन किया गया। रामचरित मानस सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा व्यास ने कथा सुनाते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का अवतार दुष्टों का विनाश करने, भक्तों का उद्धार, संतों का संरक्षण तथा राम राज्य की कल्पना को साकार रूप देने जैसे अनेक कारण से हुआ था।
राम जन्म की कथा सुनाते हुए संगीताचार्य ने कहा कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया और यज्ञ में महाराज दशरथ सभी अभ्यागतों और अपने गुरु वशिष्ठ जी समेत अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि के साथ यज्ञ मंडप में पधारे फिर विधिवत यज्ञ शुभारंभ किया गया। यज्ञ की समाप्ति के बाद समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गौ आदि भेंट दी गई हैं और उन्हें सादर विदा किया गया। यज्ञ के प्रसाद में बनी खीर को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को दी। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप तीनों रानियों गर्भवती हो गईं। दशरश की बड़ी रानी कौशल्या ने एक शिशु को जन्म दिया जो बेहद ही कान्तिवान, नील वर्ण और तेजोमय था, इसके बाद शुभ नक्षत्रों में कैकेयी और सुमित्रा ने भी अपने अपने पुत्रों को जन्म दिया। कैकेयी का एक और सुमित्रा के दोनों पुत्र बेहद तेजस्वी थे। महर्षि वशिष्ठ ने महाराज के पुत्रों का नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा।
कथा वाचक ने ताड़का वध की कथा सुनाते हुए कहा कि जब ताड़का को अपने पति की मृत्यु का पता चला तो वह अगस्त्य ऋषि से बदला लेने गई. इस पर अगस्त्य ऋषि ने भगवान विश्वामित्र से सहायता मांगी. तब विश्वामित्र के शिष्यों राम और लक्ष्मण ने मिलकर ताड़का का संहार किया था. अयोध्या के दोनों राजकुमारों राम और लक्ष्मण ने ताड़का के परिवार का अंत कर दिया। इस प्रकार कथा व्यास ने कहा कि पुष्प वाटिका में फूल तोड़ते हुए श्रीराम लताओं के बीच से वाटिका में अपनी सखियों के साथ आ रहीं सीता को देखते हैं और श्रीराम की टकटकी बंध जाती है तो वहीं सीता ने भी लताओं की ओट से राम के व्यक्तित्व को निहारते हुए अपने नेत्र बंद कर लिए और उन्हें हृदय में स्थापित कर लिया। कथा के मौके प्रीति रामायणी ने भी रामकथा के मध्यम से श्रोताओं को अनंदित किया। इस मौके पर स्वामी महानंद, संत गोपालचंद्र सहित सैकड़ों श्रोताओं ने कथा का रसपान किया।


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