पहले रोजे के साथ शुरु हुआ माहे रहमत का पहला अशरा
रमजान का पाक महीना शुरु होते ही रविवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पहला रोजा रखने के लिए समयानुसार सहरी कर रोजे की नियत की और आजान के बाद रोजदार फजिर की नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में पहुंच गए, जिसके चलते नमाजियों से मस्जिदें गुलजार नजर आई। नमाज के बाद लोगों ने कुरान की तिलावत की। वहीं महिलाओं ने घरों में नमाज अदा कर अल्लाह से खैरो बरकत की दुआएं मांगी और रोजा की हालत में महिलाएं घरेलू काम में जुट गई, तो वहीं पुरुष भी अपने अपने कार्य स्थल के लिए चले गए।
हाफिज राहत रजा बताते हैं कि इस्लाम के मुताबिक, पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, इसमें पहला अशरा यानी माह के दस दिन, दूसरा और तीसरा अशरा भी इसी तरह दस दिन का होता है। बताया कि पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। बताया कि रमजान के पहले रोजे के साथ पहला अशरा रहमत का शुरु हो गया, जो दसवें रोजे तक चलेगा। इस अशरे में सच्चे मन से अल्लाह की इबादत करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है। रमजान के पहले अशरे में मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा दान कर के गरीबों की मदद करनी चाहिए। हर एक इंसान से मुहब्बत और नरमी से पेश आना चाहिए।
