0 रमजान का रहमत का अशरा खत्म, दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू
शुभ न्यूज महोबा। मुकद्दस माह रमजान को दस-दस दिन के तीन अशरों (भागों) में बांटा गया है। पहले दस दिन रहमत का अशरा होता है। मंगलवार को दस रोजे पर रमजान का पहला अशरा पूरा होते ही दूसरा अशरा मगफिरत शुरू हो गया है। दूसरा अशरा रमजान के बीसवें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा। इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ करते हैं। इस दौरान अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा की जाती है और आल्लाह ताअला गुनहगारों की मगफिरत करके जन्नत का हकदार बनाता है।
रमजानुल मुबारक माह में आल्लाह ताअला ने कुरान नाजिल किया, इस माह में दोजख के दरवाजे बंद हो जाते है और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते है साथ ही शैतान को कैद कर लिया जाता है। इस माह में नफलोंं का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है। रमजान के दूसरे अशरे में रोजेदार रोजा रखकर इफ्तार के वक्त आल्लाह ताअला से गिड़गिड़ा कर अपने गुनाहो की मगफिरत की दुआ करता है। आल्लाह ताअला भी अपने रोजेदार बंदे से बेपनाह मोहब्बत करने के कारण उसके सारे गुनाहो को माफ करके जन्नतुल फिरदौस का हकदार बना देता है। रोजा रखने वाले रोजदारों से आल्लाह ताअला इतना खुश हो जाता है कि उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है।
दूसरे अशरे में अल्लाह तआला बंदों के गुनाहों को माफ करता है, रोजा रखने वालों के अल्लाह तआला किए गए गुनाहों को नेकियों में तब्दील कर देते हैं। इस अशरे का खास फजीलत यह है कि अल्लाह तआला फरमाता है कि है कोई गुनाहों से तौबा करने वाला है कोई मगफिरत का तलबगार। अल्लाह तआला इस मुबारक माह में गुनाहों से तौबा करने वालों के गुनाह माफ कर देता है। इस अशरे में रोजेदार अल्लाह तआला से दुआएं मांगते है तो अल्लाह उनकी दुआ कुबूल करता है। रोजे का मतलब बुराईयां और गीबत करने वालों से दूर रहने से भी है। रोजा आंख, कान और नाक का भी होता है। बुराईयों से दूर रहकर रोजा रखने वालों से आल्लाह ताअला बेहद खुश रहता है।

