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कामी क्रोधी लालची इनसे भक्ति न होय, भक्ति करै कोई शूरमा जाति वरन कुल खोय.............



0 सत्संग कार्यक्रम में कबीरी दोहे के साथ भजन की दी गई प्रस्तुति
शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को शहर के कटकुलवापुरा में स्थित कबीर आश्रम में सत्संग कार्यक्रम आयोजन किया गया, जिसकी शुरूआत जय कबीर जय कबीर जय गुरू कबीरा। दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा से की गई। सत्संग में वक्ताओं ने भगवत गीता और कबीरी दोहो के माध्यम से काम क्रोध लोभ को नरक के द्वार बताया। सत्संग में संगीतमय भजनों से उपस्थित लोगों को मंत्र मुग्ध किया गया।
समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने श्रीमद् भागवत के अध्याय 16 के श्लोक संख्या 21 की त्रिविधं नरकस्येंद दारं नाशनमात्मनः की व्याख्या करते हुए कहा कि काम क्रोध और लोभ नरक के तीन द्वार हैं, इसलिए इन्हें त्याग देना चाहिए क्योंकि इससे आत्मा का पतन होता है। उन्होंने कबीरी दोहे सुनाते हुए कहा कि कामी क्रोधी लालची इनसे भक्ति न होय। भक्ति करै कोई शूरमा जाति वरन कुल खोय। पं0 हरीशंकर नायक ने कहा कि जहां दया धर्म करुणा है वहीं ईश्वर का वास होता है। प्रदीप शर्मा ने कहा कि गरीबों की सेवा करना वंचितों को शिक्षित कराना देश की सबसे बड़ी सेवा है।
सत्संग में संगीत शिक्षक त्रिलोक ने ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन, वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी भजन प्रस्तुत किया। पं0 जगदीश रिछारिया ने अंखिया हरि दर्शन की प्यासी भजन सुनाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। बुंदेली गायक लक्ष्मी यादव ने देश भक्तिपूर्ण रचना रण में न पीठ देखइयो, मतम ां को दूध लजइयो सुनाई। कामता प्रसाद चौरसिया ने भक्तिमय रचना पढ़ी कि भरा सत्संग का दरिया नहालो जिसका जी चाहे, जिस सुन लोग गंगा स्नान करने लगे। बुंदेली फाग गायक रामऔतार सैन ने चौकड़िया फाग भजलो सीता राम तुलसी की माला लै लो हाथ में सुनाई। इस मौके पर कमलापत लखनलाल पुजारी पप्पू सैन प्रदीप शर्मा भगवानदास दयाराम राधेश्याम पुरवार सहित तमाम लोग मौजूद रहे। अंत समिति प्रमुख द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।


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