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श्रीराम की जीवन यात्रा से चुनौतियों का सामना करने की मिलती है सीख : प्रभाशंकर



0 रामकथा समापन के बाद उमंगेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में हवन कर दी आहुतियां
 शुभ न्यूज महोबा। शहर के ऐतिहासिक तीर्थ रामकुंड में चल रही रामकथा का हर्षोल्लास और भक्ति मय वातावरण के बीच दिव्य समापन किया गया। नौ दिवसीय रामकथा में प्रयागराज से पधारे पं0 प्रभाशंकर तिवारी द्वारा रामचरित मानस की प्रमुख घ्ज्ञटनाओं का विस्तारण पूर्वक श्रद्धालुओं को रसपान कराया गया, जिसे सुन लोग राम की भक्ति में लीन रहे। कथा समापन के बाद श्री उमंगेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवालय परिसर स्थित हवनकुंड में बड़ी संख्या में जनसमुदाय ने अपनी आहुतियां डालीं।
रामकथा के समापन अवसर पर पंडित प्रभाशंकर तिवारी ने कहा कि श्रीराम चरित मानस हमारे जीवन का आधार है, राम चरित मानस में ऐसी कई घटनाओं का वर्णन किया है, जो हमारी रोज की जिंदगी में आने वाली समस्याओं के निपटाने के लिए उदाहरण और प्रेरणा बन जाती हैं। यह कथा धर्म के उस ध्येय वाक्य को स्थापित करती है जो ’सत्यमेव जयते’ यानी कि ’सत्य की ही विजय होती है’ की बात करता है। सत्य की विजय होती जरूर है, लेकिन यह इतना भी आसान नहीं है, इसे कठिन बनाते हैं हमारे क्षण भर के लोभ, मोह, काम क्रोध जैसे अवगुण. श्रीराम के चरित्र की कथा इन्हीं विकारों पर विजय पाने का जरिया है। कहा कि राम चरित मानस सिखाती है कि हर मनुष्य अपने अनुभवों से ही सीखता है। भगवान राम की जीवन यात्रा से सीखने को मिलता है कि चुनौतियों का सामना करने और अपनी गलतियों से सीखने के बाद ही मनुष्य को प्रगति मिलती है। माता पिता को अपने बच्चों को अपने रास्तों पर खुद चलने देना चाहिए।


कथा व्यास द्वारा श्रीराम चरित मानस की प्रमुख घटनाओं की विस्तार पूर्वक व्याख्या करते हुए उसे सामाजिक सरोकारों से सम्बद्ध  किया और लोगों से जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वाहन किया। उन्होंने सनातन धर्म को लोक कल्याण का पर्याय और उसे सभी धर्मों का मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज धर्म, सम्प्रदाय व जातिगत विभाजन के स्वार्थपूर्ण प्रयास समाज को विखंडित कर रहे हैं और लोक कल्याण का सनातनी सिद्धान्त कहीं पीछे रह गया है। कहा कि श्रीराम का सम्पूर्ण जीवनवृत्त एक शासक का न होकर त्याग व तपस्या और आमजनों की पीड़ा, दुख दर्द को दूर करने वाले महापुरुष का रहा है जिसने विलासिता ऐश्वर्य व सत्ता भोगने वाले शासकों का आचरण त्याग कर कर्तव्यनिष्ठ, तपोनिष्ठ वाले मार्ग का अनुसरण किया और अपने उच्च आदर्शों कर्मों के बूते आमजन के बीच ईश्वरीय अवतार का दर्जा पा लिया। नौ दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों ने आध्यात्मिक अनान्द प्राप्त किया। कथा के समापन के बाद श्री उमंगेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवालय परिसर स्थित हवनकुंड में बड़ी संख्या में जनसमुदाय ने अपनी आहुतियां दी गई।


 



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