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आध्यात्मिक ज्ञान के लिए लेनी होगी गुरू की शरण------ 0 कबीर आश्रम में आयोजित सत्संग में कबीरी दोहों ने किया लोगों को मंत्र मुग्ध



शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर आश्रम में रविवार को संत कबीर अमृत वाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग की शुरूआत जय कबीर जय गुरू कबीरा दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा वंदना से की गई। कार्यक्रम में संगीतमय माहौल के साथ भक्तों द्वारा कबीर के दोहे प्रस्तुत किए गए, जिस सुन लोग मंत्र मुग्ध हो गए। सत्संग में श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक के माध्यम से भक्ति को श्रद्धा पूर्वक करने पर बल दिया गया।
समिति प्रमुख एवं साईं डिग्री कालेज के प्राचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने भागवत गीता के अध्याय 17 के श्लोक संख्या 17, 18 व 19 की व्याख्या करते हुए कहा कि बिना किसी लालच के परमेश्वर की भक्ति श्रद्धापूर्वक करना सात्विक तपस्या कहलाती है, जो तपस्या अपने सम्मान के लिए की जाती है उसे तामसी तपस्या कहा जाता है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि केवल सात्विक तपस्य सवश्रेष्ठहै अतः तुम इस करो। उन्होंने इसी बात को कबीरी दोहे के बड़े सरल शब्दो से बताते हुए कहा कि सांच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप, जाकके हृदय आप। पं0 आशाराम तिवारी ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान के लिए गुरू की शरण में जाना होना। उन्होंने तीन लोक नौ खंड में गुरू से बड़ा न कोय की विस्तार से व्याख्या की।
सत्संग में पं0 हरिशंकर नायक ने ज्ञान प्राप्ति के लिए कबीर के दोहा यह तन विषय की बेलरी गुरू अमृत की खान सुनाया। पं0 जगदीश रिछारिया ने सीता राम, सीता राम सीता राम कहिए जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए  भजन सुनाया। पूर्व प्रवक्त कामता चौरसिया ने भजन दरवार में सच्चे सद्गुरू के दुख दर्द मिटाए जाते हैं सुनाया। रामदीन अनुरागी ने देवी भजन जै हो मां चन्द्रिका भवानी सुनाया। सत्संग में ब्रजलाल, करताल वादन कमलापत, लखनलाल पुजारी, राधेश्याम पुरवार, तबलावादक सुनील जोशी सहित तमाम लोग मौजूद रहे। अंत में समिति प्रमुख द्वारा आए हुए लोगों को प्रसाद देकर सभी का आभार व्यक्त किया।


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