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श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन भोग अस्वीकार कर विदुर की सादा साग रोटी खाई



0 संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित हुए सत्संग कार्यक्रम
शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को शहर के कबीर आश्रम में सत्संग का आयोजन किया गया। समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने भगवत गीता के श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा प्रेम के भूखे होते हैं, अहंकार को नष्ट करते हैं, जिस प्रकार श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन प्रकार के भोजन अस्वीकार किए लेकिन महात्मा विदुर के यहां प्रेम के वशीभूत सादा साग रोटी खाई।
डा0 अनुरागी ने कहा कि श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि कोई मुझे प्रेम से पत्र पुष्प फल या जल प्रदान करता है तो मैं उसे स्वीकार करता हूं। उन्होंने श्लोक सुनाते हुए कहा कि पंत्र पुष्पं फलं तोयं यो में भक्त्या प्रयच्छति। तदह भक्त्युपहृतमन्शामि प्रयतात्यनः।। यही बात कबीर ने बड़े सरल दोहे में इस प्रकार कही कि रुखा सूखा खाइके ठंडा पानी पीव, देख पराई चूपड़ी मत ललचावै जीव। कार्यक्रम में कामतानाथ चौरसिया ने ई बखरी के दस दरबाजे, जाने कमै खुल जाने रे भजन की बेहतरीन प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया।
सत्संग में जगदीश रिछारिया ने श्रीराम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में भजन प्रस्तुत किया। संगीत शिक्षक त्रिलोक ने भी भजन पेश करते हुए कहा कि उमरिया बीती जाए रे जीवन जल की भरी गगरिया रीती जाए रे। पंडित हरीशंकर नायक ने अंखियां हरि दर्शन की प्यासी भजन सुनाकर उपस्थित लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। पं0 आशाराम तिवारी ने मोको कहां ढूंढे बंदे मैं तो तेरे पास में तथा भगवानदास ने तूने कभी न कृष्ण कहयो भजन प्रस्तुत किया। इस मौके पर राधेश्याम पुरवार, लखनलाल पुजारी किशोरी अनुरागी रामऔतार सैन आदि मौजूद रहे।



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