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मीरा सूर साहित्य सृजन समिति टीकमगढ़ जिला इकाई का किया गया गठन, हुई कविगोष्ठी


टीकमगढ़। श्रीराम नवमी व हिन्दू नव वर्ष पर केन्द्रित कवि गोष्ठी को आयोजन मीरा सूर साहित्य सृजन समिति टीकमगढ़ इकाई द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी द्वारा ‘छत्रसाल सम्मान प्राप्त’ ख्यातिप्राप्त साहित्यकार राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी रहे एवं अध्यक्षता एडवोकेट कौशल किशोर भट्ट ने तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में पूरनचन्द्र गुप्ता रहे। कवि सम्मेलन का संचालन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यप्रकाश ‘सत्यसुधा खरे’ ने किया। इस अवसर मीरा सूर साहित्य सृजन समिति टीकमगढ़ जिला इकाई का गठन किया गया। सभी ने नये पदाधिकारियों को बधाईयाँ दी।

कवि सम्मेलन की शुरूआत श्रीमती सुधा खरे की सरस्वती बंदना से के साथ की गयी।

सुभाषिनी खरे ने कविता सुनाई - थकने लगे तो ठहरो जरा,ठाना है हमने डरना नहीं है,

  घुट घुटकर मुझको जीना नहीं है।

सत्यप्रकाश खरे ‘सत्यसुधा’ ने गीत पढ़ा- सरस सरोवर मन भरमाते कागज कीहम नाम चलाते।

ना समझी की बात न पूछो रेत धरा पर महल बनाते।।

अध्यक्षता कर रहे राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने हिन्दू नव वर्ष पर दोहे सुनाए-

हर्ष हर्ष नव वर्ष हो, जीवन में उत्कर्ष,राना करता कामना शुचि पथ का हो दर्श।।

रामानंद पाठक नैगुवाँ ने चैकड़िया पढ़ी-

नय साल कौ करे अभिनंदन,इस पावन बेला में सबका है बंदन।

कवयित्री मीरा खरे ने गीत सुनाया- वन उपवन में लता कुज ने बंदनवार सजाये।

मीनू गुप्ता ने कविता पढ़ी-ये जिन्दगी ले चल मुझे ऐसी जगह कहीं, जहाँ खूबसूरती की भाषा अलग हो।

ओमप्रकाश तिवारी‘कक्का’(ज्यौरा) ने सुनाया-देखों मदन मार रऔ कूँकै,देखों जाँ ताँ कुसुम खिले है,

प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने चैकड़ियाँ पढ़ीं-

भरा रहे मन हर्ष से मुद्राओं से पर्स,सभी को मंगलमय हो नव वर्ष।।

युवा कवि कमलेश सेन ने कविता सुनायी- आज खिलन दो होरी रे, मन मेंबस गई गौरी रे..।

पूरनचन्द्र गुप्त ने ग़ज़ल पढ़ी- बहकावे में आने नइँयाँ, गलत राह पे जाने नइँयाँ।

रविन्द्र यादव ने मुक्तक सुनाये- गम ही बोते रहते है हम, खुशियाँ थोड़ी बो पाते है।

थोड़े से अच्छे होने से, हम अच्छे नहीं हो पाते है।।

प्रमोद गुप्ता ने सुनाया- हम शिखर के इन्दु है, गर्व से कहो हम इन्दू है।।

गुलाब सिंह यादव लखौरा ने कविता सुनायी-आज काल कें लरका खूबई अत्त तो भारी कर रय।

बाप मताई इनके मारे हा हा थराइ्र्र कर रय।।

सत्यनारायण तिवारी, ने गीत सुनाया- पाँवो को पारस कर लो,पथ की रज कंचन हो जाये।

डाॅ. प्रीति सिंह परमार ने व्यंग्य- ‘होली हाहाकार मचा रई’ सुनाकर सबको खूब हँसाया।

इस अवसर पर कौशल किशोर भट्ट,डी.पी.शुक्ला,दयाली विश्वकर्मा, डी.पी.यादव, आदि ने काव्य पाठ कर कवि सम्मेलन को ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। अंत में सभी का आभार समिति की जिलाध्यक्ष श्रीमती मीरा खरे ने व्यक्त किया।



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