टीकमगढ़ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी विवेक श्रोत्रिय ने जन सामान्य के हित, सार्वजनिक संपत्ति, आमजन की सुरक्षा, पर्यावरण एवं लोक व्यवस्था बनाये रखने हेतु टीकमगढ़ जिले की सम्पूर्ण राजस्व सीमा में खेत में गेहूं एवं अन्य फसलों के डंठलों (नरवाई/पराली) में आग लगाई जाने पर प्रतिबंध लगाया है। प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 अंतर्गत धारा 223 व अन्य विधिक प्रावधानों के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।
ज्ञातव्य है कि मध्यप्रदेश में वायु ( प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा (5) के तहत पर्यावरण विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन अनुसार नरवाई में आग लगाने की घटनाओं को प्रतिबंधित कर दण्ड (पर्यावरण क्षति पूर्ति राशि) अधिरोपित करने का प्रावधान किया है।
(अ) 2 एकड़ तक के कृषकों को रूपये 2500/- का अर्थदण्ड प्रति घटना।
(2) 2 से 5 एकड़ तक के कृषकों को रूपये 5000/- का अर्थदण्ड प्रति घटना।
(स) 5 एकड़ से बड़े कृषकों को रूपये 15000/- का अर्थदण्ड प्रति घटना।
नरवाई में आग लगाने पर प्रतिबंध लगाया जाना जनहित में अति आवश्यक है-
1. नरवाई एवं पराली में आग लगाना कृषि के लिये नुकसानदायक होने के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी हानिकारक है।
2. पराली/भूसा जलाने से प्रथम दृष्टया निम्नलिखित नुकसान होने से जनहित में इस पर आवश्यक रोक लगाई जाना आवश्यक है।
1. खेत की आग से अनियंत्रित होने पर जन, धन, संपत्ति प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव जन्तु आदि नष्ट हो जाते हैं जिससे व्यापक नुकसान होता है।
2. खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु इससे नष्ट होते है, जिससे खेत की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे घट रही है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
3. खेत में पड़ा कचरा, भूसा, डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। जिन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है।
4. आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

