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वनमाली सृजन केन्द्र की ‘महापुरुषों’ पर केन्द्रित कवि गोष्ठी हुई, वनमाली सृजन केन्द्र व म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़ का सयुंक्त आयोजन


टीकमगढ़// नगर साहित्यिक संस्था वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ एवं म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 324वीं कवि गोष्ठी सयुंक्त रूप से ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में ‘महापुरुषों’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी है। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता उपन्यासकार यदुकुल नंदन खरे (बल्देवगढ़) ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में शासकीय जिला पुस्तकालय के लाइबे्ररियन विजय मेहरा रहे एवं विषिष्ट अतिथि के रूप में कवि रामसहाय राय (रामगढ़) रहे।

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की इस समीक्षा गोष्ठी में शासकीय जिला पुस्तकालय के लाइबे्ररियन श्री विजय मेहरा ने ‘बुन्देली’ में राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ के संपादन में प्रकाशित त्रैमासिक ई पत्रिका ‘अनुश्रुति’ के जनवरी-मार्च 2025 अंक की समीक्षा पढ़ते हुए कहा कि-‘अनुश्रुति’ पत्रिका बुन्देली के प्रसार एवं प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। साथ ही इसमें देश भर से बुन्देली रचानाएँ निःशुल्क प्रकाशित कर संपादक राना लिधौरी जी बुन्देली की अविश्मरणीय सेवा कर रहे हैं। इसी क्रम में सपंादक राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बताया कि इस बार का ‘आकांक्षा’ हिन्दी पत्रिका का ‘धरा’ पर केन्द्रित विशेषांक प्रकाशित किया जा रहा है। जिनके लिए उन्होंने रचनाएँ आमंत्रित की है।

गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती पूजन दीप प्रज्ज्वलन के बाद वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती बंदना कर रचना पढ़ी- मेरे देश के महापुरुषों,की सुहानी कहानी है, अमर कहानी है।

बड़ोराघाट के विशाल कड़ा ने पढा-तू नायक है इस युग का,फिर क्यों मायूसी छाई है।

 अधियारों को दो ललकार इक नई दिवाली आई है।

राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने दोहे पढे़-सत्य अहिंसा से अधिक, नहीं बड़ा हथियार।

दुश्मन भी अपना बने, पाकर मन का प्यार।।

रामगोपाल रैकवार ने दोहे कहे- जगत को जीतना कठिन इतना नहीं है।

 स्वयं को जीत लेता जो उसे महावीर कहते है।।

अस्तौन के हरबल सिंह लोधी ने पढ़ा -स्त्री जाति खो शिक्षित करवे, पहली शाला खुलवा गये।

ज्योतिवा फूले जी क्रांतिकारी बन भारत देश जगा गये।।

प्रमोद मिश्रा (बल्देवगढ़) ने पढ़ा-गलती कोऊ करो जिन जान, हिलमिल सबखों राने,

त्यागों ऊँच नीच को भेद दुष्मन करें कभऊ ना छेद, रइयों एक बढ़ै उम्मेद,जगत्तर तुमखाँ माने।

प्रभुदयाल श्रीवास्तव‘पीयूष’ ने रचना पढ़ी - गौरे गालन पै तिल कारौ, हियरा हरत हमारौ।

अंग अंग साँसे कौ डारो, चिलकत जैसे परौ।।

युदुकुल नंदन खरे (बल्देवगढ़) ने पढ़ा-आप करें कुछ भी करें करते रहें,सदा ही आगे बढ़ते रहे।

कमलेश सेन ने कविता पढ़ी - वक्त कैसा आ रहा है आदमी को आदमी खा रहा है।।

प्रमोद गुप्ता ने सुनाया - छत्रसाल महाराज थे प्यारे, जन जन के थे आँखों के तारे।

सियाराम अहिरवार ने पढ़ा- बाबा तुम हो गये महान, कर मानव कल्याण।

भूलों को रास्ता दिखलाया,अज्ञानी को ज्ञान कराया।।

रामसहाय राय (रामगढ़) ने कविता पढी- संसार के सभी ऋषि मुनियों की घड़कन,

ईश्वर ने भारत की मातृ भूमि ही चुनी।।

पलेरा के रविन्द्र यादव ने पढ़ा -मिट्टी से बना आदमी,सोने की ख्याहिशे।

फिर कैसे नहीं होगा, परेशान बोलिए।।

एस.आर. सरल ने पढ़ा-देश का उद्धार बाबा कर गये,सुन विरोधी गर्जनाये रह गये।।

इनके अलावा शकील खान, अजीत सिंह, शालिनी सिंह,मनोज श्रीवास्तव, आदि ने अपनी रचनाएँ व विचार रखे। गोष्ठी का संचालन रविन्द्र यादव’ ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।



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