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14 वर्ष वनवास के बाद जन्मभूमि लौटे तुलसीराम श्रद्धालुओं ने किया स्वागत, परिवार से रहेंगे विरक्त, पूरे जीवन धर्म की अलख जगायेंगे


चरण सिंह बुंदेला, बड़ागांव धसान। 14 वर्ष वनवास के बाद बनवासी तुलसीराम अपनी जन्मभूमि लौट आए हैं। 15 मई 2011 को तुलसीराम संकल्प लेकर 14 बरस के लिए वनवास गए थे।समय पूरा होने पर लौट आए हैं।बड़ागांव आने पर श्रद्धालुओं ने ढोल नगाड़े के साथ उनका जोरदार स्वागत किया है। बड़ागांव आने पर कृषि उपज मंडी के पास स्वागत किया गया , इसके बाद बनवासी तुलसीराम धनुषधारी मंदिर पहुंचे यहां दर्शन करने के बाद बड़ागांव के प्रसिद्ध बजरंग आश्रम मंदिर पहुंचे ,जहां बजरंगबली के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और उन्होंने अपने अपने बनवासी जीवन के बारे में संक्षिप्त रूप से श्रद्धालुओं को संबोधित भी किया। 

तुलसीराम बड़ागांव के वार्ड क्रमांक 1 मिथिला खेरा निवासी हैं।40 वर्षीय तुलसीराम राजपूत ( लोधी )परिवार से हैं और अंतर मन में वृद्धि होने पर 15 मई 2011 को अकेले ही पैदल वनवासी जीवन के लिए निकल गए थे, 14 वर्ष पूर्ण होने पर वे 15 मई 2025 को अपनी जन्मभूमि लौट आए हैं,वे पत्नी बच्चों,माता-पिता स्वजनों को छोड़कर वनवास के लिए चले गए थे। जन्मभूमि लौटने पर वे अब परिवार से पूरी तरह विरक्त हैं। तुलसीराम का कहना है कि अब पूरा जगत उनका परिवार है और सब के कल्याण के लिए वे भगवान से कामना करते हैं।

तुलसीराम बताते हैं कि भगवान राम वनवास के दौरान भारत के जिस भूमि और जिस क्षेत्र में गए थे ,वह भी उस भूमि में 14 वर्ष तक विचरण करते रहे , बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, तेलंगाना ,आंध्र प्रदेश ,तमिलनाडु आदि प्रांतो में जहां-जहां राम गये वहां -वहां का भ्रमण किया और केवल जंगलों के रास्ते ही उनका इतना समय व्यतीत हुआ ।बड़ागांव से जब पैदल वनवास को गए तो अयोध्या पहुंचने पर उन्होंने राम हर्षण दास महाराज से दीक्षा ली थी। गुरुवार को बड़ागांव जन्मभूमि लौटने पर स्वजनों एवं श्रद्धालुओं से औपचारिक भेंट की इसके बाद अब पूरा जीवन स्वजनों से विरक्त होकर गुजारेंगे एवं एक आश्रम की स्थापना होगी और ताजिंदगी धर्म कीअलख जगायेंगे।


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