0 67 एकड़ एरिये में 200 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा जिला करागार
शुभ न्यूज महोबा। जिला मुख्यालय में पहले से 180 कैदी की क्षमता वाले उपकारागार में 400 से अधिक कैदी अपनी सजा काट रहे हैं वहीं उपकारागार में कैदियों की अधिक संख्या होने के कारण बाल अपराध वाले कैदियो को चित्रकूट बाल सुधार गृह भेजा जाता है। कैदियों की संख्या और उनकी सहुलियत को देखते हुए जिले में अत्याधुनिकता के साथ तीन सुरक्षा लेयर और 16 बैरक वाले जेल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें 200 करोड़ की लगात लगाते हुए 67 एकड़ एरिया में इस जेल को बनाया जा रहा है। इस नई जेल का सितम्बर माह तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था, जिसका ग्लोबल जॉन सेनेटरी प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ द्वारा निर्माण तेजी से करते हुए कार्य को अंतिम चरणों में पहुंचा गया है।
उक्त जानकारी देते हु जेल का निर्माण करा रहे ग्लोबल जान सेनेटरी प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के प्रोजेक्ट मैनेजर एमएम त्रिपाठी ने बताया कि जिला कारागार महोबा में 6 बैरक 120 कैदी प्रति बैरक क्षमता वाली मल्टी स्टोरी, 4 महिला बैरक जिसकी क्षमता 60 महिला कैदी प्रति बैरक बनाई गई है। वहीं 60 बच्चों के लिए अलग से बैरिक का निर्माण किया गया है जिससे इस जिले के अपराध कार्य करने वाले बच्चे बाहर न जा सकें। बताया कि बुंदेलखंड में केवल झांसी की जेल में 854 कैदियों को रखने की क्षमता है जबकि महोबा की इस जेल में 990 कैदियों के रखें जाने की क्षमता रखी गई हैं। आवासीय परिसर को भी बेहद भव्य स्वरूप दिया गया है जेल के बाहरी फेश में कम्युनिटी सेंटर, गेस्ट हाउस, टाइप टू के मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में 170, टाइप 3 के 5, टाइप 4 के 4 आवास बनाए गए हैं जबकि फूल टाइम सीएमओ का एक अलग आवास रहेगा। एक अस्पताल, मल्टीपरपज हाल, हाई सिक्योरिटी बैरक, स्कूल, कैंटीन सहित जेल की सभी मूलभूत आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा गया हैं ।
बताया कि जिला जेल के निर्माण में सुरक्षा पर ज्यादा फोकस करते हुए बाउंड्री वाल 20 फीट ऊंची, सर्कल वाल 18 फिट, इंटरनल वाल 10 फिट की बनाई गई है। जेल में 21 मेन गेट बनाए गए हैं जिनमें चौबीस घंटे जेल सुरक्षा कर्मियों का पहरा रहेगा। सुरक्षा के लिए कई टावर अलग से बनाए गए है एक सेंट्रल टावर बनाया गया है जो मध्य जेल से पूरी जेल परिसर की निगरानी करेगा। पेयजल के लिए जेल में 2 लाख लीटर क्षमता के दो ओवरहेड टैंक बनाए गए है। 22 बोर जेल के परिसर में किए गए है जो जेल को पानी की सुगम आपूर्ति करते रहेंगे। बताया कि जिला जेल के निर्माण में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि किसी भी काम से बाहरी व्यवस्था पर जेल के कैदी आश्रित न रहें। खेती किसानी मेन बाउंड्री और सर्किल बाउंड्री के बीच होगा, जहां पर सब्जी खेती किसानी के लिए कुल जेल रकवा 66 एकड़ में से 10 एकड़ कृषि कार्य बागवानी के लिए आरक्षित किया गया है जिसमें कैदी बागवानी, खेती किसानी के अपना समय पास करेंगे।
इंसेट
जिला जेल का 80 प्रतिशत कार्य हो चुका पूरा
जिला जेल का निर्माण करा रहे पीडब्ल्यूडी भवन निर्माण खंड बांदा के अधिशाषी अभियंता शुभेंदु कुमार ने बताया कि पहले इसके निर्माण पूरा करने को 18 माह का समय एग्रीमेंट में चीफ इंजीनियर ने दिया था और 16 मई 2023 को इस काम के निर्माण की तिथि दी गई थी, जिसे 18 माह में नवंबर 2024 में पूरा होना था। कार्य पूरा न हो पाने पर इसको एक साल का एक्सटेंशन दिया गया अब हर हाल में सितंबर तक जिला जेल का समस्त काम पूरा करा लिया जायेगा। जेल प्रशासन के अधिकारियों की अंतिम जांच निरीक्षण के बाद 2026 में हर हाल में ये जिला जेल चालू हो जायेगी। 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है इंटरनल वाशिंग पेंटिंग गेट विंडो आदि का काम शेष है जो जल्द पूरा कराया जा रहा है । लगभग 50 करोड़ की लागत से यहां इंटर्नल सीसी सड़कों का निर्माण किया गया है। पहली बार जेल प्रशासन ने वॉल, फ्लोरिंग टाइल्स मार्बल्स, पंखों कूलर का प्रयोग किया है। ताकि कैदी यहां बेहतर माहौल महसूस कर सकें।
