0 कबीर आश्रम में आयोजित किया गया अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन
शुभ न्यूज महोबा। शहर के मोहल्ला कटकुलवापुरा स्थित संत कबीर आश्रम में रविवार को संत कबीर अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग में कबीरी दोहो के अलावा श्रीमद् भागवत गीता के श्लोकों को सुनाकर उनके हिन्दी अर्थ में वर्णन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत जय कबीर जय गुरू कबीर। दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा से की गई।
सत्संग में समिति प्रमुख एवं साईं डिग्री कालेज के प्राचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने भागवत गीता के अध्याय 17 का श्लोक 20 की व्याख्या करते हुए कहा कि दातव्यमिति यददानं दीयेते अनूप करणे। देशे काले च पात्रे च तदतानं राजसं स्मृतम अर्थाथ जो दान निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद दिया जाता है उसे सतोगुणी दान कहते हैं और जो दान किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दिया जाए तो उसे राजसी दान कहते हैं। उन्होंने कहा कि जो दान बुरे मन से या कुपात्रों का दिया जाता है वह तामसी दान कहा जाता है। इनमें सतोगुणी दान सर्वश्रेष्ठ होता है। संत कबीर ने भी कहा है कि दान दिए धन न घटै, नदी न घटै नीर। अपनी आंखो देख लो यों क्या कहैं कबीर।
संगीत शिक्षक त्रिलोक ने निर्गुण भजन जीवन जल की भरी गरिया रीती जाय रे, उमरिया बीती जाए रे सुनाया। इसी प्रकार भजन गायक इंद्रजीत सिंह ने सबसे ऊंची प्रेम सगाई भजन की प्रस्तुति दी। पूर्व प्रवक्ता कामता प्रसाद चौरसिया ने मन भजलो सीताराम करो न देरी, कब जाने स्वांशा कढ़ जाएगी तेरी सुनाया। शिक्षक सुरेश सोनी ने भजन सुनाया कि हम परदेशी फकीर किसी दिन याद करोगे। पं0 हरीशंकर नायक ने राम बुलाया भेजिया दिया कबीरा रोय, जो सुख साधु संग में सो बैकुंठ न होय के माध्यम से सत्संग का महत्व बताया। रामऔतर सैन ने कबीरी भजन कब भजहौ सतनाम प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र वर्मा ने वसुधैव कटुम्बकम की भावना से ओत प्रोत स्वरचित पंक्तियां गर मेरी हुकूमत चले तो इस धरती को एक परिवार बना दूं प्रस्तुत कर तालियां बटारी। इस मौके पर पप्पू सैन, लखनलाल, करताल वादक कमतापत ढोलक वादक सुरेश सोनी, जगदीशचंद्र अनुरागी गौरीशंकर आदि लोग मौजूद रहे।
सभी दान में सतोगुणी दान होता है सर्वश्रेष्ठ : एलसी अनुरागी
May 04, 2025
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