टीकमगढ़।आज स्थानीय सर्किट हाउस में आपातकाल दिवस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी स्वप्निल तिवारी व प्रफुल्ल द्विवेदी ने बताया कि आज आपातकाल दिवस के 50वें वर्ष पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है , तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए आपातकाल थोप दिया था और देश के नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली थी। आज आपातकाल दिवस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विधायक उमेश शुक्ला, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी मधुसूदन पित्रे व भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत , कार्यक्रम संयोजक महामंत्री आशुतोष भट्ट ,सह संयोजक इंजी अभय प्रताप सिंह यादव व मुकेश अहिरवार शामिल हुए। शुरुआत करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत ने कहा कि आज से 50 वर्ष पहले 25 जून 1975 को, कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था। यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। यह सत्ता बचाने की लालसा में संविधान को रौंदने का कुत्सित प्रयास था। जहां कांग्रेस ने संविधान के अनुच्छेदों का उपयोग केवल सत्ता में बने रहने के लिए किया, वही मोदी सरकार हर अनुच्छेद के महत्व को नागरिकों तक पहुंचाने की जागरूकता अभियान चला रही है।न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता , ये चार स्तंभ सिर्फ किताबों में नहीं, आज मोदी सरकार में नीति और शासन का आधार बन चुके हैं। मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विधायक उमेश शुक्ला ने कहा कि 1975 में आपातकाल की घोषणा कोई राष्ट्रीय संकट का नतीजा नहीं था बल्कि यह एक डरी हुई प्रधानमंत्री की सत्ता बचाने की रणनीति थी,
जिसे न्यायपालिका से मिली चुनौती से बौखला कर थोपा गया। इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति की आड़ लेकर अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया, जबकि ना उसे समय कोई युद्ध की स्थिति थी, ना विद्रोह और ना ही कोई बाहरी आक्रमण हुआ, यह सिर्फ इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा की चुनावी सदस्यता रद्द करने के निर्णय को निष्क्रिय करने और अपनी कुर्सी को बचाने की जिद्द थी। कांग्रेस सरकार ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका सहित लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को बंधक बनाकर सत्ता के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। प्रेस की स्वतंत्रता पर ऐसा हमला हुआ कि बड़े-बड़े अखबारों की बिजली काट दी गई, सेंसरशिप लगाई गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया। इंदिरा गांधी ने मीशा जैसे काले कानून के जरिए एक लाख से अधिक नागरिकों को बिना किसी मुकदमे के जेलों में ठूंस दिया, जिनमें जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेई, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, और राजनाथ सिंह सहित तमाम वरिष्ठ विपक्षी नेता, पत्रकार तो शामिल थे ही लेकिन कांग्रेस शासन ने छात्रों तक को जेल में सड़ने पर मजबूर कर दिया था। विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए लोकतंत्र सेनानी मधुसूदन पित्रे ने कहा कि कांग्रेस सरकार की मंशा में तो कहा गया कि आपातकाल के दौरान यदि किसी नागरिक को गोली मार दी जाए तब भी उसे अदालत में जाने का अधिकार नहीं है। यह कांग्रेस का संविधान के प्रति सम्मान था और यही कांग्रेस आज संविधान की झूठी दुहाई देती फिर रही है। कांग्रेस सरकार ने आपातकाल के दौरान प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तक को भंग कर दिया, ताकि कोई संस्थान उनकी सेंसरशिप और मीडिया पर हमले की आलोचना न कर सके। जो कांग्रेस एक समय प्रेस पर सेंसरशिप थोपती थी, भाई आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरें फैलाने वालों को खुला संरक्षण देती है और वैचारिक विरोधियों की आवाज दबाने के लिए मुकदमे दर्ज कराती है। इंदिरा गांधी ने मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी की परंपरा को तोड़ते हुए सभी निर्णय एक व्यक्ति के इशारे पर लेना शुरू कर दिया। विरोधियों को जिलों में मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी गई, किसी को दवा नहीं दी गई, किसी को गर्मी में बिना पंखे के बंद रखा गया। महिला कैदियों के साथ भी अमानवीय व्यवहार हुआ, उन्हें न तो समुचित चिकित्सा दी गई, ना ही उनके साथ सम्मान पूर्वक व्यवहार किया गया। जो संविधान बाबा साहेब अंबेडकर ने जनता को अधिकार देने के लिए बनाया था, कांग्रेस ने उसी को हथियार बनाकर जनता के अधिकार छीन लिए। आपातकाल के 21 महीनों में कांग्रेस ने हर आलोचक, हर असहमति और हर विपक्षी विचार को देशद्रोह का तमगा देकर कुचल डाला। न्यायपालिका में हस्तक्षेप, फ्री स्पीच के नाम पर अराजकता और मीडिया ट्रायल को बढ़ावा देकर कांग्रेस आज नए तरीकों से वही आपातकाल लागू करना चाहती है।
*हरिशंकर खटीक की बहन को दी गई मौन श्रद्धांजलि*
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में भाजपा प्रदेश महामंत्री व जतारा विधायक हरिशंकर खटीक की बड़ी बहन , दीनानाथ जी की पत्नी व विजय रत्नाकर जी की माताजी श्रीमति वती जी निवास महरौनी को एंव भाजपा के वरिष्ठ नेता गणेशी लाल नायक के पिताजी को मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी गई
*भाजपा ने मीशा बंदियों व उनके परिजनों का कार्यालय में सम्मान किया*
आज स्थानीय भाजपा कार्यालय में मीशा बंदियों व उनके परिजनों का सम्मान किया गया व उस तत्कालीन समय का अनुभव जाना गया। मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत, पूर्व विधायक उमेश शुक्ला, लोकतंत्र सेनानी मधुसूदन पित्रे, लोकतंत्र सेनानी सनत कुमार जैन, सुनीत जैन,आवेग तिवारी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष कौशल किशोर भट्ट, केशव यादव व सुनील कुमार घुवारा , राहुल तिवारी आदि मुख्य रूप से मंच पर शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन व कार्यक्रम संयोजक आशुतोष भट्ट ने किया व सह संयोजक इंजी अभय प्रताप सिंह यादव रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। कार्यक्रम में मीशा बंदियों ने बताया गया कि आपातकाल दौरान सभी की स्वतंत्रता छीन ली गई, जिसने भी आवाज उठाई उन्हें जेल में बंद कर दिया गया, पत्रकारों व वरिष्ठ साहित्यकारों को जेल में यातनाएं दी गई, एक प्रकार से पूरे लोकतंत्र की हत्या की गई।

