0 संत कबीर अमृतवाणी सत्संग में वक्ताओं ने सुनाए कबीरी दोहे और भजन
शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में शहर के मोहल्ला कटकुलवापुरा स्थित कबीर आश्रम में अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सत्संग में वक्ताओं द्वारा कबीरी दोहो के माध्यम से जीवन जीने का मार्ग बताया साथ ही श्रीमद् भागवत गीता की व्याख्या करते हुए कृष्ण द्वारा पीपल वृक्ष रोपित करने के अनंत फल बताए।
सत्संग कार्यक्रम की शुरूआत जय कबीर जय गुरू कबीरा, दास तोरे द्वारा खड़े उनकी हरो पीरा भजन से की गई, इसके बाद समिति प्रमुख एवं साईं डिग्री कालेज प्राचार्य डा0 लालचंद्र अनुरागी ने श्रीमद् भागवत गीता के अध्याय 10 श्लाक संख्या 26 अश्नत्थः सर्ववृक्षागां देवर्षीणां च नारदः। गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धांना कपिलो मुनिः की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण जगत के आधार हैं। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि मैं वृक्षों में पीपल हूं, देवर्षियों में नारद हूं, गन्धर्वों में चित्ररथ हूं सिद्ध पुरुषों में कपिल मुनि हूं। प्राचार्य ने बताया कि पीपल वृक्ष चौबीस घंटे आक्सीजन देता है, इसलिए सभी को पर्यावरण की रक्षा के लिए पीपल वृक्ष के अलावा आम बरगद आंवला जामुन आदि के वृक्ष लगाना चाहिए ये वृक्ष मानव को फल प्रदान करते हैं और बदले में कुछ भी नहीं लेते।
बुंदेलखंड मुक्ति मोचा के गायक इद्रजीत सिह ने कबीर का भजन चादर हो गई बहुत पुरानी, अब तो सोच समझ अभिमानी भजन सुनाया। पं0 जगदीश रिछारिया ने भजन मन फूला फूला फिरे जगत में कैसा नाता रे सुनाया। पूर्व प्रवक्ता कामता चौरसिया ने राम नाम आधार जगत में, ध्रुव प्रहलाद कहो री भजन प्रस्तुत किया। सुनीता अनुरागी ने सत्य वचन का अनुशरण करने के लिए साच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप की विस्तार से व्याख्या की। मदन पाल राठौर ने सत्संग से ज्ञान प्राप्त कर अनुशरण करने के लिए कबीर के दोहा साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय, सार सार को गह लये, थोथा देय उड़ाय की विस्तार से व्याख्या की। वरिष्ठ कवि हरिश्चद्र वर्मा ने कबीर की भक्ति पर रचना प्रस्तुत की। इस मौके पर ढोलक वादक सुरेश सोनी, नारायणदास, लखनलाल, सचिन सोनी, करताल वादक कमलापत आदि भक्त मौजूद रहे।


