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गुरुपूर्णिमा पर म.प्र.लेखक संघ की हुई 327वीं कवि गोष्ठी, गुरु की जो सेवा करे,मिले उसे सम्मान- राना लिधौरी


टीकमगढ़। नगर सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 327वीं कवि गोष्ठी ‘गायत्री शक्तिपीठ वानपुर दरवाजा, टीकमगढ़’ में ‘गुरु पूर्णिमा ’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी है। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती मीरा खरे ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् श्री शीलचन्द्र जैन एवं विषिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षक एवं वरिष्ठ गीतकार वीरेन्द्र चन्सौरिया एवं एक्सीलेंस आफ प्रधानमंत्री कालेज टीकमगढ़ में भारतीय ज्ञान प्रकोष्ट के प्रभारी के प्रोफेसर डाॅ.सिद्धनाथ खजूरिया जी रहे।

डाॅ.सिद्धनाथ खजूरिया जी ने गुरू के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु का हमारे जीवन में बहुत महत्व है उनके मार्गदर्शन में ही हम आगे बढ़ते है। शिक्षाविद् श्री शीलचन्द्र जैन ने कहा कि-गुरु हमारे भविष्य का निर्माता है। उनकी कृपा अपने शिष्यों पर सदैव बनी रहती हैं। लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि अपने जीवन से हमने जिस किसी से भी थोड़ा बहुत कुछ भी सीखा हो वे सभी हमारे गुरु है हमें उनका एहसान कभी नहीं भूलना चाहिए। वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती मीरा खरे ने कहा कि गुरु का दर्जा भगवान से भी बढ़कर माना गया है।

गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती,गायत्री, गुरुपूजन व दीप प्रज्ज्वलन के बाद वीरेन्द्र चंसौरिया ने यह गुरु बंदना की- गुरु देव मेरे देव,मेरे पास आओ,मुझे समझाओं, हे मेरे गुरुदेव।

मुझमें क्या कमी है जो औरों में नहीं है ये भी बताओ गुरुदेव।।

राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने दोहे पढ़े-गुरु की जो सेवा करे,मिले उसे सम्मान।

गुरु के ही आशीष से बनता शिष्य महान।।

सियाराम अहिरवार ने पढ़ा -गुरु ज्ञान देकर अपनढ़ को, ज्ञान की ज्योति जलाते हैं।

अंधकार को दूर भगाकर उजियाला कर जाते है।

स्वप्निल तिवारी ने रचना पढ़ी-मेरे अंतर्मन में विराजे है, हे गुरु देव।

मैं भी धूल तेरे आँगन की हे गुरु देव।।

रविन्द्र यादव’ ने पढ़ा- मानवता की सेवा करना, कर्तव्य है, एहसान नही।।

कमलेश सेन ने पढ़ा -गुरुदेव हमारे ज्ञान के दाता, प्रथम ज्ञान माता से आता।।

प्रमोद गुप्ता ’मृदुल’ ने रचना- गुरु ज्ञान का कुण्ड है, गुरु गुणो की खान।

गुरु मेरा आदर्श है, गुरु मेरा भगवान।।

शकील खान’ ने ग़ज़ल पढ़ी - मिलेगा ज्ञान बिन कैसे गुरु, चरण छूता हूँ मैं अपने गुरु के।।

श्रीमती मीरा खरे, ने रचना पढ़ी- गुरु की महिमा का मैं, कैसे करूँ बखान,

गुरु से ही तो किया है, यह सब अर्जित ज्ञान।।

इनके अलावा डाॅ. पी.के खरे, मोहनलाल पाल, श्रीमती लता खरे, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

गोष्ठी का संचालन कमलेश सेन ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।



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