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गुरू पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा



0 महर्षि वेद्रव्यास के अवतरण दिवस पर गोष्ठी का आयोजन कर ऋषि मुनियों को किया नमन
शुभ न्यूज महोबा। प्रति वर्ष की भांति इस साल भी गुरूवार को गुरू पूर्णिमा पर गुरू गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में श्रद्धालु द्वारा ऐतिहासिक गुरू गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखगिरि की परिक्रमा लगाते हुए सुख समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की गई। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद शिव मंदिर प्रांगण में महाभारत ग्रंथ रचयिता महर्षि वेद्रव्यास के अवतरण दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जहां पर गुरू पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालत हुए बुंदेलखंड को अपनी तपस्थली बनाने वाले महर्षि वेदव्यास व ऋषि मुनियों को भी नमन किया।
गोरखगिरि पर्वत की परिक्रमा सुबह छह बजे शिवतांडव मंदिर से प्रारंभ हुई जो महावीरन, पठवा के बाल हनुमान, रामजानकी मंदिर, कबीर आश्रम, बाबा हाजी फीरोजशाह की दरगाह, रामदरबार मंदिर, काली माता व छोटी चंद्रिका देवी मंदिर से होते हुए पुलिस लाइन रोड से नागौरिया मंदिर, कालभैरव मंदिर से शिवतांडव में आकर समाप्त हुई। परिक्रमा दौरान श्रद्धालु हाथों में ध्वज लेकर जय श्रीराम, जय गोरखनाथ के जयकारे लगाते हुए पैदल चल रहे थे साथ ही मार्ग पर पड़ने वाले समस्त ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में माथा टेंकर देश दुनिया में सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना की गई। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए समिति प्रमुख डा0 एलसी अनुरागी ने बताया कि चौदह वष्र के वनवासकाल दौरान भगवान राम, लक्ष्मण व माता सीता इस पर्वत पर आए थे और उनके चरण पड़ने से यह पर्वत चित्रकूट के कामदगिरि की तरह चारो फल धर्म अर्थ काम मोक्ष देने वाला हो गया।
पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी ने कहा कि आषाढ पूर्णिमा को पराशर ऋषि के पुत्र वेदव्यास का जन्म हुआ था। उनके जन्म के कारण ही इस पूर्णिमा को राष्ट्रीय अवकाश घोषित होना चाहिए। समाजेसवी विनोद पुरवार ने बताया कि गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, जिसे आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन को गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त कराना चाहिए विशेष रूप से महर्षि वेदव्यास के प्रति, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना की थी। पं0 हरीशर नायक ने श्रीमद्भगवत गीता के श्लोक की व्याख करते हुए कहा कि सतोगुण से ज्ञान, रजोगुण से लोभ व तमोगुण से अज्ञान प्राप्त होता है। इस मौके पर अधिवक्ता सुनीता अनुरागी, रज्जू द्विवेदी, अमरचंद्र विश्वकर्मा, आशीष पुरवार, पवन चौरसिया, गौरीशंकर, परशुराम अनुरागी सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे। अंत में मुन्नालाल धुरिया द्वारा प्रसाद वितरण का आयोजन कर पुन्य कमाया।  



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