0 कबीर आश्रम में आयोजित किया गया अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम
शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को मोहल्ला कठकुलवापुरा स्थित कबीर आश्रम में कबीर सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग की शुरूआत कबीर वंदना जय कबीर जय कबीर जय गुरू कबीरा दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा से की गई। इसके बाद कबीर प्रेमियों ने संगीतमय कबीरदास के दोहे को गाते हुए उनकी व्याख्या की साथ श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक का वर्णन करते हुए वातारण को कृष्ण की भक्ति में सराबोर कर दिया।
सत्संग में समिति प्रमुख एवं साईं डिग्री कालेज के प्रधानाचार्य डा0 एलसी अनुरागी ने कहा श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 09 के श्लोक संख्या 29 समोअहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योअस्ति न प्रियः, ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्सम्। की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मैं किसी से ईर्ष्या नहीं करता, पक्षपात नहीं करता बल्कि सभी के सथ समभाव रखता हूं। बताया कि यही बात कबीर कहते हैं कि कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर। कार्यक्रम में मौदहा हमीरपुर से आए गंगादीन ने एक तुमही आधार सद्गुरू भजन की बेहतरीन प्रस्तुति दी। भजन गायब इंद्रजीत सिंह ने मन लागा मोरो यार फकीरी भजन प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों की तालियां बटोरी।
सत्संग में पं0 हरीशंकर नायक ने दान दिए धन न घटै नदी न घटै नीर की व्याख्या करते हुए कहा कि दान देने से धन नहीं घटना बल्कि उनमे वृद्धि होती है, इसलिए सभी को अपनी कमाई का दस प्रतिशत हिस्सा दान जैस मुनीत कार्य में अवश्य लगाना चाहिए। रचनाकार सुखराम स्नेही ने बस्ती बस्ती पर्वत पर्वत गाता जाए बंजारा, लेके दिल का इक तारा रचना प्रस्तुत की। बासुरी वादक जगदीश रिछारिया ने भजन अब लौ नसानी अब न नसैहो सुनाया। कामता चौरसिया ने भी पानी में मीन प्यासी मोहे सुन सुन आवै हासी भजन प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र वर्मा की रचना कबीर जी हमने चाहा सिद्दत से, हम उनके भक्त रहे मुद्दत से को खूब सराहा गया। इस मौके पर करताल वादक कमलापत, देवेंद्र मोहन चौरसिया, सुरेश सोनी आदि भक्त मौजूद रहे।

