टीकमगढ़// नगर सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 328वीं कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में राष्ट्रकवि डाॅ.मैथिलीशरण गुप्त जंयती पर केन्द्रित आयोजित की गयी है। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रामगोपाल रैकवार (टीकमगढ़) ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभुदयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष (टीकमगढ़) एवं विषिष्ट अतिथि के रूप में कवि श्री रामसहाय राय (लार खुर्द) रहे।
गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती पूजन दीप प्रज्ज्वलन के बाद वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती बंदना कर यह रचना पढ़ी- मन के गहरे अंधियारे में ज्ञान का दीप जला दो। मन में भरा अभिमान हमारा मैया दूर हटा दो।। रामसहाय राय (रामगढ़) ने कविता पढी- भारी थकी थकी सी क्यों लगती है नदी हमारे गाँव की। अब क्यों पड़ती नहीं जरूरत इसे कभी भी नाव की।। प्रमोद मिश्रा (बल्देवगढ़) ने पढ़ा- काय बरसा बरसवे रौयत पानी। जितै देखो उतै पानी-पानी।। युदुकुल नंदन खरे(बल्देवगढ़) ने पढ़ा-बह रही है विकास की गंगा। फिर भी है भूखा कोई नंगा।। राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने दोहे सुनाए-जन्म लिया चिरगाँव में राष्ट्रकवि ये महान। मैथिली शरण नाम है अद्भुद थे विद्वान।। रामगोपाल रैकवार’ ने रचना- काव्य मैथिलीशरण में, भारत माँ प्रतीत। रखा हमारे सामने, गौरवमयी अतीत।। हरबल सिंह लोधी(अस्तौन) ने पढ़ा-देश के युवा दिशा न भटके सो देशभक्ति की रचना सुनाते थे आज जयंती राष्ट्रकवि की, वे दद्दा जी कहलाते थे।। एस.आर.‘सरल’ ने पढ़ा- लगत काले काले बादर सैर करने आए हैं। धरती की बेंचैंनी को, बे आज बुझाने आए हैं।। शकील खान ने ग़ज़ल कही - किसी का जल रहा है घर तो जलता देखते रहना। ना जब तक आग ठंड़ी हो तमाशा देखते रहना।। रविन्द्र यादव ने पढ़ा- तुम भी इसी संसार में सुख ढूँढ रहे थे। क्या तुमको अभी राम कहानी नहीं पता।। वीरेन्द्र त्रिपाठी ने पढ़ा- बदरवा कारे कारे बरसे हारे हारे। मीरा खरे ने पढ़ा- वन उपवन में, लता कुंज ने वंदनवार सजाएए धरती मंद मंद मुस्काए। प्रभुदयाल श्रीवास्तव‘पीयूष’ ने रचना पढ़ी - आजीवन करते रहे,शब्द सृजन का काम। हे दद्दा जी आपको, शत्शत बार प्रणाम।। कमलेश सेन ने पढ़ा -सावन का मौसम आया। देखो कितना पानी लाया।। विशाल कड़ा’ ने पढ़ा- शब्द समर्पित करते है हम, मिलकर आज सभी नमन है तुमको राष्ट्रकवि।। अनवर खान ‘साहिल’ ने ग़ज़ल कही-पूस का माह आने वाला है। उर मेरे पास इक दुशाला है।। प्रभुदयाल श्रीवास्तव‘पीयूष’ ने रचना पढ़ी - जै तन रै गव इतै, मन विचरत ब्रज बीच। जितै किशोरी कृष्ण पै, केशर रईं उलीच।। इनके अलावा डाॅ. एन,एम.अवस्थी, डी.पी.यादव, गोष्ठी आदि ने भी अपने विचार पृकट किये। कविगोष्ठी का संचालन कमलेश सेन ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।


