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स्वतंत्रता संग्राम से पत्रकारिता तक : पीताम्बर अध्वर्यु की 48वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा “सत्य का साथ, त्याग ही पहचान” — अध्वर्यु को नमन अध्वर्यु का जीवन संदेश : सत्ता नहीं, सत्य का साथ


टीकमगढ़। शाने पार्क में रविवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार व जनसेवक गौरव पीताम्बर अध्वर्यु की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर याद किया। सभा की अध्यक्षता सुरेश मिश्रा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पवन घुवारा, मनोज चौबे, मुन्नालाल, स्वप्निल तिवारी उपस्थित रहे। आयोजन समिति के अध्यक्ष कौशल किशोर भट्ट एवं सभी वरिष्ठ पत्रकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

“सत्ता नहीं, सत्य का साथ ही पत्रकारिता का स्वाभिमान”

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने अध्वर्यु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संदेश स्पष्ट है—

 सत्ता नहीं, सत्य का साथ।

 तोष नहीं, तर्क।

ताम्रपत्र नहीं, त्याग।

यही पत्रकारिता का स्वाभिमान और जनसेवा का सार है।

संघर्ष और त्याग से भरा जीवन

30 अगस्त 1977 को 61 वर्ष की आयु में स्वर्गवास करने वाले अध्वर्यु स्वतंत्रता संग्राम, पत्रकारिता और जनसेवा—चारों मोर्चों पर अद्वितीय पहचान रखते थे।

जन्म : 12 जुलाई 1918, टीकमगढ़।

पिता : ओरछा राज्य के तहसीलदार पंडित परमेश्वरी दयाल अध्वर्यु।

शिक्षा : 1942 में प्रयाग विश्वविद्यालय से स्नातक; जिले के प्रथम स्नातक।

1947 तक भारत सरकार के नेनीताल संस्थान में अकाउंट ऑफिसर, परंतु स्वतंत्रता संग्राम की पुकार पर पदत्याग।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

1936 में छात्र रहते ही सत्याग्रह का नेतृत्व किया।

1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू का स्वागत करने पुलिस निगरानी चकमा देकर पहुँचे।

विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार कर आजीवन खादी धारण की और खादी भंडार की स्थापना की।

15 अगस्त 1973 को आज़ादी की रजत जयंती पर मध्यप्रदेश शासन ने उनके योगदान को स्मरण किया।

भारत सरकार से मिली स्वतंत्रता सेनानी पेंशन और ताम्रपत्र उन्होंने जनहित में लौटा दिए।

पत्रकारिता में निर्भीक पहचान

अध्वर्यु की लेखनी 20 से अधिक हिंदी-अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई।

टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, हितवाद, लीडर, क्रोनिकल इत्यादि में नियमित लेखन। 

स्वयं का साप्ताहिक पत्र “विन्द्रय-वाणी” (बिन्धबाण) भी प्रकाशित।

विनोबा भावे के विचारों का प्रचार-प्रसार किया।

उनकी निर्भीक व जनपक्षधर पत्रकारिता ने उन्हें बुंदेलखंड में “भैयाजी” के नाम से लोक आस्था का पर्याय बना दिया।

संस्थापक व समाजसेवी योगदान

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संस्थापक सचिव।

जिला सहकारी भूमि विकास बैंक के संस्थापक अध्यक्ष।

टीकमगढ़ महाविद्यालय की स्थापना में निर्णायक भूमिका।

छुआछूत और जात-पांत के कट्टर विरोधी, सामाजिक समरसता और धर्मनिरपेक्ष दृष्टि उनकी पहचान।

पवन घुवारा की अपील

श्रद्धांजलि सभा में पवन घुवारा ने विशेष रूप से टीकमगढ़ मेडिकल कॉलेज की शीघ्र स्थापना की मांग की और इस संबंध में कलेक्टर महोदय का ध्यान आकर्षित किया।

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*( समीर खान )*

*!! शुभ न्यूज़ टीकमगढ़ !!*

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