टीकमगढ़। भारतीय किसान संघ द्वारा भगवान बलराम जयंती का आयोजन जिले के विभिन्न ग्रामों में श्रद्धा व उत्साह के साथ किया जा रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को जन्मे भगवान बलराम जी, भगवान श्रीकृष्ण से 11 माह 17 दिन बड़े थे। वे वासुदेव व माता रोहिणी के पुत्र थे।
कृषि और पशुपालन के प्रतीक
श्रीकृष्ण जी पशुपालन से जुड़े रहे, वहीं श्री बलराम जी ने कृषि को उन्नत करने पर बल दिया।
उन्हें सृष्टि का प्रथम नहर एवं बीज वैज्ञानिक माना जाता है।
उन्होंने प्राकृतिक फसलों से बीज उत्पादन और नहरों के माध्यम से व्यवस्थित खेती की शुरुआत की।
अस्त्र के रूप में हल और मूसल को अपनाने के कारण वे हलधर कहलाए।
राष्ट्रवादी और गैर-राजनीतिक चरित्र
भगवान बलराम जी ने सदैव राष्ट्र को सर्वोपरि रखा।
जरासंध के युद्ध में उन्होंने देश को संकट से बचाने हेतु अपने आप का समर्पण कर दिया।
महाभारत के दौरान जब सभी राजा किसी न किसी पक्ष में युद्ध कर रहे थे, तब वे किसी का पक्ष न लेकर तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े।
इस प्रकार उनका चरित्र राष्ट्रवाद और गैर-राजनीतिक मूल्यों से परिपूर्ण रहा
भारतीय किसान संघ ने इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए भगवान बलराम जी को किसानों के आराध्य कुलदेवता के रूप में अंगीकार किया है।
किसान संघ द्वारा कार्यक्रम
किसान संघ ने भगवान बलराम जयंती के अवसर पर 15 दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की है।
शुरुआत दिगौड़ा तहसील के ग्राम बर्माडांग से हुई, जहां जिलाध्यक्ष शिव मोहन गिरि ने किसानों को भगवान बलराम के महत्व के बारे में बताया।
तहसील अध्यक्ष फूल सिंह घोष ने बलराम जी के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला
इसके बाद दूसरा कार्यक्रम ग्राम अस्तौन में आयोजित हुआ, जिसमें जिला उपाध्यक्ष भागवत सिंह सोलंकी व अनेक पदाधिकारी एवं ग्रामीण किसान शामिल हुए।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख किसान
ग्राम समिति अध्यक्ष इंद्र सिंह बुंदेला, कन्हैया लाल तिवारी, कललू मिश्रा, ईसान घोष, महुम घोष, सुजान सिंह घोष, मनीराम केवट, राजू सेन, लंपू चढ़ार, प्रभु घोष, लक्ष्मण पाल, कन्नू चढ़ार, किशन रैकवार, अतुल चढ़ार, कोमल रैकवार, मथुरा, राघवेंद्र आदिवासी, बाबू आदिवासी, रोहित आदिवासी, चंद्रभान घोष, कृष्ण केवट, टीटू अहिरवार, सोनू अहिरवार, गंधर्व सिंह घोष, ब्रजकिशोर, पार्वती बाई, भान सिंह घोष सहित अनेक किसान मौजूद रहे।

