टीकमगढ़। 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मैं समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ। यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उन महान क्रांतिकारियों को स्मरण करने का भी है, जिन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे हैं और आज़ादी का 79वां पर्व मना रहे हैं, वह उन्हीं बलिदानियों की अमूल्य देन है।
स्वतंत्रता का अर्थ – अंतिम व्यक्ति तक अधिकार
आज का यह पावन दिवस एक नए संकल्प का दिन है — उन सपनों को पूरा करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने एक आज़ाद और समृद्ध भारत के लिए देखे थे। आज भी देश में ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं — चाहे वे दलित हों, आदिवासी हों, पिछड़े वर्ग से हों या किसी भी समाज से संबंधित हों। हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी आवाज बनकर, उनके अधिकारों के लिए प्रतिबद्धता के साथ संघर्ष करें और उनकी आवाज को बुलंद करें
जब आख़िरी व्यक्ति तक पहुंचे अधिकार, तभी होगी सच्ची आज़ादी
इस अवसर पर मेरा मन गर्व से भर जाता है कि हमें स्वतंत्र हुए 79 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन सच्ची स्वतंत्रता तभी होगी जब समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी उसके मूल अधिकार पूर्ण रूप से प्राप्त होंगे। जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। यही हमारा संकल्प है और यही हमारी राष्ट्रभक्ति की असली पहचान है।

