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मौत का खौफ बना 80 साल पुराना स्कूल भवन, 1050 बच्चियों की जिंदगी खतरे में...

विनोद जैन, बकस्वाहा। नगर की हृदयस्थली बस स्टैंड पर स्थित पी.एम. श्री शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का करीब 80 साल पुराना जर्जर भवन इन दिनों बच्चियों की जान पर आफत बन चुका है। दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और छत से लगातार पानी टपकने के कारण हालात इतने खतरनाक हो गए हैं कि हल्की बारिश या तेज हवा से भी बड़ा हादसा हो सकता है। विद्यालय में वर्तमान समय में लगभग 1050 छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें रोज मौत के साये तले पढ़ाई करनी पड़ रही है। 12 अगस्त को एसडीओ (राजस्व) और उपयंत्री ने विद्यालय भवन का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भवन का आकार 36.60 मीटर गुणा 10 मीटर है और यह पूरी तरह से जर्जर स्थिति में है अधिकारियों ने अनुशंसा की है कि भवन को तत्काल ध्वस्त करना अनिवार्य है, अन्यथा कभी भी गंभीर दुर्घटना घटित हो सकती है। इसी दिन विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति की बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि इस पुराने भवन को गिराकर उसकी जगह समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्वीकृत नए कक्ष बनाए जाएं। इन कक्षों में भौतिक, रसायन और जीवविज्ञान प्रयोगशालाएं तथा दो व्यावसायिक कक्ष शामिल हैं। निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी विभाग से होना प्रस्तावित है, किंतु जर्जर भवन ध्वस्त किए बिना काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार विधालय मे कुल 22 कमरों में से 11 कमरों की छत से लगातार पानी टपकता है और शेष कक्ष भी खस्ताहाल हैं। बरसात के दिनों में बच्चियां जान जोखिम में डालकर कक्षा  में बैठ कर मध्याह्न भोजन ग्रहण करती हैं। इस संबंध में कई बार जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और नगर परिषद को पत्र भेजा जा चुका है। अब निरीक्षण रिपोर्ट और एसएमडीसी का प्रस्ताव भी प्रशासन के पास है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

विद्यालय प्रभारी राधव नापित ने बताया कि शासन से पांच नए कक्षों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। जर्जर भवन को गिराने के लिए एसडीएम, तहसीलदार, नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी सहित वरिष्ठ कार्यालयों को पत्र भेजा गया है। तहसीलदार भरत पांडे ने कहा कि भवन को गिराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी से अनुमोदन पत्र आवश्यक है और जैसे ही आदेश जारी होगा, कार्रवाई की जाएगी।विद्यालय प्रबंधन समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि भवन ध्वस्त किए जाने के बाद मलबे से निकलने वाली उपयोगी सामग्री को नगर परिषद और तहसील प्रशासन की देखरेख में अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

अभिभावकों का कहना 

वे अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजते हैं, मौत के मुंह में धकेलने के लिए नहीं। अभिभावक व पालक संघ सहित छात्राओं की यही मांग है कि जर्जर भवन को तत्काल गिराकर नए स्वीकृत कक्षों का निर्माण शुरू किया जाए, ताकि बच्चियों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके।


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