Type Here to Get Search Results !
पाए सभी खबरें अब WhatsApp पर Click Now

गोस्वामी तुलसीदास एवं मुंशी प्रेमचंद्र की जायंती पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने आयोजित की काव्य गोष्ठी

 


तुलसीदास ने श्रीराम चरित मानस लिखकर राम भक्ति को घर घर पहुंचाया
शुभ न्यूज महोबा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में शनिवार को गोस्वामी तुलसीदास एवं मुंशी प्रेमचंद्र जयंती के उपलक्ष्य में शहर के हवेली दरवाजा मुहाल स्थित सेवाजसेवी प्रेमचंद्र साहू के आवास में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में साहित्यकारों ने तुलसीदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनकी विनम्रता झलकती रचनाएं प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्र मुग्ध किया साथ ही हिन्दी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद्र जीवन ओर उनके द्वारा लिखी पुस्तकों से भी रूबरू कराया। गोष्ठी दौरान समाजसेवियों को शाल भेंट कर उनको सम्मानित किया गया।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत मुख्य अतिथि व अतिथियों ने मां सरस्वती, गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद्र के चित्र पर माल्यापर्ण कर की। इसके बाद श्रीराम सोनी ने मां सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने के बाद उन्होंने तुलसीदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह एक महान संत थे। गोष्ठी का संचालन कर रहे कवि संतोष द्विवेदी विगुल ने रचना पढ़ते हुए कहा कि संत शिरोमणि तुलसीदास का जग में फैला नाम है, तुलसी से पावन तुलसी को कोटि कोटि प्रणाम है। पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी ने रचना सुनाई कि तुलसी तुमको मेरा है वंदन, तुम्हारी रचनाओं से देश हमारा बना चंदन। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विष्णुरात चतुर्वेदी विदेह ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम चरित मानस लिखकर घर घर पहुंचा दिया है। उन्होंने तुलसीदास जी को एक संत के साथ साथ एक महान समाज सुधारक भी बताया। 


अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष व सांस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सदस्य संगीताचार्य पंडित जगप्रसाद तिवारी ने रचना सुनाते हुए कहा कि पूज्य तुलसी के चरणों में कोटि अभिनंदन हमारा तुम जनम से हर्षित मन हमारा। संगीताचार्य ने मुंशी प्रेमचंद्र के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई सन् 1880 में बनारस शहर एक गांव में हुआ था और उनका वास्तविक नाम धनपतराय था। तिवारी जी ने बताया कि उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। सहित्यकार संतोष कुमार पटेरिया ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की रचना से उनकी विनम्रता झलकती है और रामचरित मानस में जगह जगह उन्होंने अपने आपको बहुत छोटा बताते हुए प्रभु श्रीराम की भक्ति पर जोर दिया है। इस मौके पर लखनलाल चौरसिया, रामप्रकाश पुरवार, ओमप्रकाश तिवारी, रामप्रकाश शुक्ल, संतोष कुमार वर्मा, हरिश्चंद्र वर्मा, प्रमोद सक्सेना, डा0 एलसी अनुरागी सहित तमाम कवि व साहित्यकारों ने अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।



- - इसे भी पढ़ें - -

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad