0 अकीदतमंदों ने मजार पर चादरपोशी कर मांगी दुआएं
शुभ न्यूज महोबा। हजरत अब्दुल समद साहब रहमत उल्लाह अलैह (अब्बा हुजुर) का सालाना रविवार को धूमधाम के मनाया गया। उर्स के मौके पर जिले के अलावा बांदा, छतरपुर, हमीरपुर राठ सहित कई जिलों से भारी संख्या में अकीदतमंदों ने आकर शिरकत की। मेहमानों के खानपान से लेकर ठहरने तक का इंतजाम सज्जादा नशीन द्वारा किया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मजार ए अकदस पर चादर और फातिहा में शामिल होकर दुआएं मांगी।
अब्बा हुजूस के सालान उर्स होने वाले संदल के मौके पर शनिवार की रात साढ़े नौ बजे एएस इस्लामियां स्कूल से चादर जुलूस निकाला गया, जो परम्परागत मार्ग से होता हुआ मजार ए अकदस पर पहुंचा, जहां पर लोगों की बुलंद आवाज से लगाए गए नारा-ए-तकवीर अल्लाहो अकबर की सदाओं से मजार परिसर गूंज उठा और इसके बाद अकीदत और एहतिराम के साथ मजार पर लोगों ने चादर चढ़ाई। चादर जुलूस में भारी संख्या में लोगों ने शिरकत की। चादर जुलूस दौरान लोग नालिया कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे। सालाना उर्स में हर साल की तरह इस साल भी अकीदतमंदों का जमावड़ा लगा रहा। लोग सुबह से ही मजार पर पहुंच गए जहां पर सभी ने फातिहा के बाद दुआएं मांगी।
रविवार की तड़के सुबह से ही लोगों का मजार परिसर में आना शुरु हो गया अैर बाद नमाज फजर परिसर में कुरान ख्वानी का आयोजन किया गया तथा फातिहा के बाद लोगों को तबर्रूख वितरित किया गया। उर्स के मौके पर सुबह से देर रात में पुरुषों के साथ साथ महिलाओं जमावड़ा लगा रहा और मजार पर फातिहा, दुआ और मन्नातों का दौर जारी रहा। उर्स में कमेटी के साथ साथ अन्य अकीदतमंदों ने लंगर का इंजाम कराया और बिरयानी, बूंदी, जर्दा के अलावा अन्य खाने पानी की सामग्री का फतिहा के बाद लोगों में वितरित किया। मजार पर दो दिन तक नातिया कलाम के साथ साथ दीनी तकरीर चलती रही, जिसे सुनने के लिए लोगों की खासी भीड़ जुटी रही।
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शहर के तीन मजारों को सालाना उर्स आज
चेहल्लुम पर्व के बाद से ज्यादातर मजारों का सालाना उर्स का सिलसिल शुरू हो जाता है और कमेटियों द्वारा उर्स का धूमधाम के साथ आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में 24 अगस्त को शहर में स्थित तीन मजारों का उर्स एक ही दिन मनाया जाएगा। मोहल्ला कसौरा में हजरत अमीन शहीद शाह रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स सोमवार को मनाया जाएगा। इसके अलावा इसी दिन हजरत वाहरे शहीद रहमतुल्लाह अलैह और हजरत दादा शाह रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स है। तीनों मजारों पर उर्स के मौके पर चादर चढ़ाने के बाद तकरीर, नातिया कलाम के साथ साथ लंगर का भी आयोजन किया जाएगा।

