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हजरत कुद्दूस पीर के सालाना उर्स में फातिहा के बाद बांटा गया तबर्रूख, नातिया कलाम की सजी महफिल



शुभ न्यूज महोबा। शनिवार को हजरत कुद्दूस पीर रहमतउल्लाह अलैह का सालाना उर्स हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। उर्स में शिरकत करने के लिए मजार-ए-अकदस पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ जुटी। शुक्रवार की रात नमाज-ए-इशा के बाद अकीदतदों द्वारा चादर जुलूस निकाला गया, जो प्रमुख मार्गों से होता हुआ रात में करीब साढ़े दस बजे बस्ती के बीच पहाड़ पर स्थित मजार पर पहुंचा और अकीदत के साथ चादर चढ़ाई गई और फातिहा के बाद दुआएं मांगी गई। फातिहा के मौके पर मुस्लिम समुदाय के अलावा हिन्दू भाईयों की खासी भीड़ जुटी।
हजरत कुद्दूस साहब के उर्स पर मजार-ए-अकदस सुबह फजर नमाज के बाद कुरान ख्वानी हुई, जहां भारी संख्या में लोगों ने पहुंचकर कुरान की तिलाबत की और इसके बाद मौजूद हाफिजों द्वारा फातिहा शुरु की गई, जिसे लोगों ने अहतिराम और खामोशी के साथ सुनी। फातिहा के बाद दुआ का सिलसिला शुरु हुआ, जिसमें लोगों ने हाथ उठाकर अल्लाह से दुआ मांगी। फातिहा के बाद सभी लोगों में तबर्रूख बांटा गया। शनिवार की दोपहर दो बजे मजार परिसर में उर्स का आयोजन किया गया, जहां पर भारी संख्या में महिला पुरुषों की भीड़ जुटी। उर्स के मौके पर अलग अलग लोगों ने देगे तैयार कराकर फातिहा दिलाई और बनाई गई बिरयानी, दालचा, जर्दा आदि लंगर लोगों को बैठाकर खिलाया। कुद्दूस पीर साहब का मजार पहाड़ पर होने के बाद भी अकीदमंद ऊंचाई पर चढ़कर मजार तक पहुंचे, जहां पर अकीदतमंदों ने फतिहा पढ़ी ओर लंगर का स्वाद चखा। सुबह से देर शाम तक अकीदतमंदों का मजार में आने जाने वालों का सिलसिला जारी रहा। 


इस मौके पर मौलाना ने खिताब करते हुए कहा कि बुजुर्गों के आस्ताने से कोई भी खाली नहीं जाता है। आज भी बुजुर्गों के आस्ताने से लोग फैज पाते हैं। उन्होंने कहा कि आज लोग दीनी तालामी से दूर भागते हैं, यही वजह है कि मुस्लिम समुदाय परेशान हैं। हमे अल्लाह और अल्लाह के रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलना चाहिए। मालिक-ए-मुल्क के यहां देर है अंधेर नहीं, हमे अल्लाह ताआला पर पूरा यकीन है और इंसान को उस पर ही यकीन रखते हुए ही हर काम का आगाज करना चाहिए। उर्स के मौके पर नालिया कलाम का भी आयोजन किया गया।
इंसेट
हजरत अब्दुल समद का मनाया जाएगा सालाना उर्स
हजरत अब्दुल समद (अब्बा हुजूर) का सालान उर्स 23 व 24 अगस्त जोशो खरोश और धूमधाम से मनाया जाएगा। 23 अगस्त की रात ईशा की नमाज के बाद संदल और 24 अगस्त को उर्स का आयोजन किया जाएगा। उर्स की कमेटी द्वारा सारी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई। मजार परिसर को बिजली की लाइटों के साथ साथ झंडियों, झंडे व अन्य खूबसूरत सामग्री लगाकर सजाया जा चुका है। उर्स के मौके पर कमेटी के साथ साथ अन्य अकीदतमंदों द्वारा लंगर का इंतजाम किया जाएगा साथ ही नातिया कलाम के अलावा अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।




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