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हजरत शेख मखदमू शाह के सालाना उर्स का कुल की फातिहा के साथ हुआ समापन



0 मजार के मुजावर और मोहल्ला कत्तीपुरा से निकाला गया चादर जुलूस
शुभ न्यूज महोबा। हजरत शेख मखदूम शाह रहमतुल्लाह अलैह का दो दिवसीय सालाना उर्स का बुधवार को कुल की फातिहा के साथ समापन किया गया। दो दिन चले संदल व उर्स मुबारक में अकीतदमंदों ने चादर जूलूस निकालकर मजार पर चादरपोशी की और फातिहा के बाद लोगों में आपसी भाईचारा और मुल्क में अमन चैन की दुआएं मांगी गई। उर्स मुबारक पर मजार परिसर में कव्वाली के साथ साथ नातिया कलाम और तकरीर की भी महफिल सजाई गई।
शहर के मोहल्ला शेखनपुरा स्थित हजरत मखदूम शाह की दरगाह का सालाना उर्स के मौके पर मंगलवार की रात साढ़े नौ बजे मोहल्ला कत्तीपुरा वाशिंदों ने चादर जुलूस निकाला, जो ऊदल चौक, सुभाष चौक होते हुए मजार-ए-अकदस पर पहुंचा। जुलूस दौरान लोग सिर पर बड़ी बडी थाली में चादर रखकर चल रहे थे, तो वहीं अकीदमंदों में खामोशी अख्तियार किए हुए नातिया कलाम सुनते हुए आगे बढ़ रहे थे। जैसे ही चादर जुलूस के मजार पर पहुंचे तो आतीशबाजी का बेहतरीन नराजा पेश किया गया और इसके बाद मजार पर चादर चढाकर फातिहा पढ़ी गई। इस मौके पर अकीदतमंदों ने फातिहा में  शामिल होकर खैरो बरकत की दुआएं मांगी। 


उर्स के मौके पर एहसान निजामी ने सूफियाना कव्वालियों से लोगों को देर रात तक बांधे रखा। कव्वाली सुन लोग झूम गए और कव्वाल से मुसाफा करते हुए उन्हें नजराना भी पेश किया। मजार के मुजावर हाफिज हनीफ साहब के घर से भी चादर उठाई गई। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मजार में संदल शरीफ की रस्म अदायेगी के बाद संदल को आम जायरीन के लिए तकसीम किया गया इसके बाद फातिहा और दुआ का सिलसिला जारी रहा, जिसमे अकीदतमंदों ने हाथों को उठाकर सच्चे मन से दुआ मांगी। बताया कि कुल की फातिहा के बाद लोगों में मीठे चावल तकसीम किया गया। हाफिज ने बताया कि मान्यता है कि मजार शरीफ से उतारे गए संदल में रूहानियत होती है और संदल से शरीर की ऊपरी बीमारियों में शिफा मिलती है।



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