0 मेले में दुकाने लगाने वाले दुकानदारों का महीनों के भरण पोषण का हो जाता है बनदोबस्त
शुभ न्यूज महोबा। उत्तर भारत के ऐतिहासिक कजली मेले का एक अपना अलग महत्व है। इस मेले को देखने के लिए 800 साल बाद भी लाखों भीड़ जुटती है। इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक कजली मेले को लेकर बुंदेलखंड के लोगों में आज भ विशेष उत्सुकता बनी है। यही वजह है कि ऐतिहासिक ग्रामीण कजली मेले को भले ही एक सप्ताह दूर हो, लेकिन मेला परिसर में अभी से चहल पहल बढ़ गई है। कारण, रक्षाबंधक ने पूर्व यहां बुंदेली बेटियां इस मेले में अपने अपने घर अवश्य आती हैं और मेला स्थल घूमने जाती है, जिससे वहां चहल पहल दिखाई देने लगी है।
मालूम हो कि मशहूर कजली मेला बुंदेलखंड में ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, सतना के अलावा कन्नौज, बैरागढ़ सहित अन्य स्थानों पर अपनी छाप बनाए हुए है। यही वजह है कि तमाम जिलों के लोग कजली मेला देखने के लिए आते हैं। यह मेला आल्हा ऊदल की याद में लगाया जाता है। आल्हा ऊदल के शौर्य वीरता और ताकत का कजली मेले में आल्हा गायन के जरिए वर्णन किया जाता है, जिसे सुनने के लिए भी आज भी लोग आते हैं। कजली मेले में बनाए गए आल्ह मंच में एक सप्ताह तक बुंदेली विधाए राई, नृत्य, ढिमरियाई नृत्य, आल्हा गायन आदि को सुनने और देखने का मौका मिलता है।
गौरतलब है कि 844 साल से अनवरत् लगते आ रहे कजली मेले को आज तक राष्ट्रीय मेले का दर्जा नहीं मिला है, जिसके चलते सैकड़ों साल पुराने मेले को वह स्वरुप नहीं मिल पा रहा है, जिस मेले का यह हकदार है। कजली मेला देखने के लिए लोग महीनों से तैयारियां करते हैं। कजली मेले की तिथि घोषित होते ही तमाम लोग अपने परिवार के साथ महोबा आ जाते हैं। रक्षाबंधन त्योहार में महिलाआेंं के आने की वर्षो पुरानी परम्परा आज भी कायम है। कजली मेले में दूर दराज से आने वाले बड़े बड़े दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानें लगाई जाती है, जहां पर अच्छी खासी बिक्री होती है। इतना ही नहीं कजली मेले में दुकाने लगाने वाले दुकानदारों के परिवार का महीनों के भरण पोषण का भी बनदोबस्त हो जाता है।
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पोस्टर पम्पलेट छपवाने का कार्य अंतिम दौर पर
ऐतिहासिक कजली मेले को लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है पालिका प्रशासन द्वारा निकाली जाने वाली शोभा यात्रा और मेले के प्रचार प्रसार का दायित्व निभाया जाता है। नगर पालिका द्वारा शहर में कई स्थानों पर स्वागत द्वार बनाए जाते हैं, जहां पर वीर आल्हा ऊदल के पोस्टर और पंपलेट लगाए जाते हैं। पालिका प्रशासन द्वारा नगर के अलग अलग स्थानों पर पोस्टर बैनर लगाकर मेले का अच्छा खासा प्रचार किया जाता है, इसके अलावा बसों और ट्रकों में पंपलेट लगा दिए जाते है, जिससे दूसरे जिले के लोगों को भी कजली मेले की जानकारी हो जाती है।
