0 मजार-ए-अकदस पर फातिहा के बाद मांगी मुल्क में अमन चैन और आपसी भाईचारे की दुआएं।
शुभ न्यूज महोबा। हजरत हाजी कुतुबशाह रहमत उल्ला अलैह का सालाना उर्स शुक्रवार को बड़े धूमधाम से मनाया गया। उर्स के मौके पर बाद नमाज जौहर मजार ए अकदस पर सारा दिन लंगर चलता रहा, जहां पर हजारों लोगों ने फातिहा के बाद तबर्रूख का स्वाद चखा साथ ही तमाम महिला और पुरुषों लंगर घर भी ले गए। इस मौके पर दूर दराज से आए तमाम लोगों ने मजार पर फातिहा पढ़ी और मन्नते मानी। इससे पूर्व गुरूवार की रात संदल के मौके पर महफिल-ए-समा का आयोजन किया गया, जिसमे रामपुर, बांदा आदि से आए कव्वालों ने अपनी कव्वालियों से सूफियाना माहौल बनाकर लोगों को रात बांधे रखा।
शहर के कल्याण सागर तट पर हजरत हाजी कुतुबशाह रहमत उल्ला अलैह के अस्थाने पर हर साल की तरह इस वर्ष भी अकीदतमंदों ने हर्षोल्लास और उत्साह के साथ उर्स का आयोजन किया। गुरूवार की रात मजार-ए-अकदस का गुस्ल किया और इसके बाद संदल हुआ। वहीं करीब साढ़े नौ बजे मोहल्ला कत्तीपुरा से हाफिज अब्दुल्लाह के घर से चादर जुलूस निकाला गया, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ मजार ए अकदस पर पहुंचा। चादर जुलूस पहुंचते ही नारा ए तकबीर अल्लाहु अकबर की सदाए बुलंद करते हुए अकीदतमंदों ने मजार पर चदर चढ़ाने के बाद फातिहा हुई और तबर्रूख का वितरण किया गया। उर्स के मौके पर सारी रात महफिल-ए-समा का आयोजन किया गया, जिसमें रामपुर कव्वाल दानिश मोसिन अली खान और दिलबर ताज सूफी कब्बालों ने अपनी सूफियाना कव्वालियों से समा में चार चांद लगा दिए। देर तक लोगों ने कव्वालियों का लुत्फ उठाया और बीच बीच में कव्वालों से मुसाफा करते हुए उनका हौसला बुलंद किया।
शुक्रवार की सुबह मजार परिसर में कुरान ख्वानी हुई, जिसमें मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों और मुस्लिम समुदाय के लोगों कुरान की तिलावत की गई। हाफिजों द्वारा फातिहा मुकम्मल करने के बाद दुआ मे मुल्क की तरक्की, अमन चैन और आपसी भाईचारे की दुआएं की गई। उर्स के मौके पर लोगों ने बड़ी बडी देगों में बिरयानी, जर्दा, हलवा आदि तबर्रूख के लिए बनवाया और दोपहर बाद फातिहा दिलाकर लोगों को बैठाकर खिलाया गया साथ ही पार्सल बनाकर लोगो में वितरित भी किया गया मजार पर मुस्लिम भाईयों के अलावा हिन्दू भाईयों ने भी उर्स के मौके पर शिरकत कर हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का संदेश दिया।
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13वीं सदी में आए थे हजरत कुतुब शाह
डा. आरिफ राइन ने बताया कि ऐतिहासिक कल्याण सागर सरोवर के तट पर स्थित प्रसिद्ध सूफी सत हजरत हाजी कुतुबशाह की मजार स्थित है। बताया कि 13वीं सदी के करीब यहां आए हजरत कुतुब शाह से हर समुदाय और धर्म के लोग अपनी मन्नते मांगते हैं और उनकी जायज मुरादे पूरी भी होती हैं। बताया कि खिदमत गुजार मरहूम हाजी बजीर ने इस दरगाह का निर्माण करवाया और इसके बाद उनके पुत्र मरहूम हाजी अब्दुल कादिर राइन ने अपने भाईयों के साथ मिलकर दरगाह की खिदमत की।

