0 17 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती वर विशेष
शुभ न्यूज महोबा। भारतीय संस्कृति में विश्वकर्मा को विश्व का प्रथम इजीनियर और शिल्पकार कहा जाता है साथ ही वह वास्तुशास्त्रे गं्रथ के रचयिता भी थे। वास्तुकला को एक शास्त्र के रुप में प्रस्तुत करने वाला यह विश्व का प्रथम ग्रंथ है। विश्वकर्मा शस्त्र शास्त्र आभूषण विमान के भी जनक थे और उन्होंने पुष्पक विमान का निर्माण किया था। यह विमान पृथ्वी, जल व आकाश मार्ग में चलता था। प्रति वर्ष 17 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती मनायी जाती है। यह वह दिन है जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है। इस दिन का औद्योगिक जगत और भारतीय कलाकारों, मजदूरो, इंजीनियर्स आदि के लिए खास महत्व है।
यह जानकारी गोरखगिरि परिक्रमा समिति के प्रमुख एवं साईं कालेज के प्राचार्य डॉ. एलसी अनुरागी ने बुधवार को विश्वकर्मा जयंती की पूर्व संध्या पर एक मुलाकात दौरान दी। उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा के पिता अष्टवासु व माता वस्त्री थी। विश्वकर्मा की मां देव गुरू वृहस्पति की बहन व अंगिरा ऋषि की पुत्री थी। विश्वकर्मा जी ने इंद्र नगरी, इंद्र का हथियार वज्र, विजय नामक रथ और पुष्पक विमान का निर्माण किया था साथ ही कर्ण के कानों के कुंडल, शिव का त्रिशूल, विष्णु का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड, प्राचीनकाल की सभी राजधानियों के अलावा सतयुग के स्वर्णलोक और नंदनवन का भी निर्माण किया था। बताया कि द्वापर युग में भी उनके द्वारा द्वारिका, हस्तिनापुर और सुदामापुरी नगर का भी निर्माण किया गया था। उन्होंने सभी देवताओं के भवन उनके दैनिक जीवन के उपयोग की वस्तुओं, कुबेर की राजधानी को भी निर्मित किया था।
उच्च प्राथमिक विद्यालय पसवारा कंपोजिट के सहायक अध्यापक योगेंद्र अनुरागी ने बताया कि आज विदेश के वैज्ञानिक भगवान विश्वकर्मा के बनाए अद्भुद हथियारों के माध्यम से शोध कर रहे हैं। ऐसे महान शिल्पी की जयंती पर हमे उनके आदर्शों पर चलकर देश सेवा का व्रत लेना चाहिए। पंचांग के अनुसार हर साल कन्या संक्रांति पर भगवान विश्कर्मा की जयंती मनाई जाती है और इसी दिन अस्त्र और शस्त्र की पूजा भी की जाती है साथ ही शिल्पकार और यंत्रों के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने का विधान है। इस दिन हर कारखाने, फैक्ट्री और दुकानों में उनकी धूमधाम से पूजा की जाती है।

