0 कबीर आश्रम में संत कबीर अमृत वाणी सत्संग सकित द्वारा आयोजित किया गया सत्संग
शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को शहर के कबीर आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग की शुरूआत कबीर वंदना जय कबीर, जय गुरू कबीर, दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा से हुई, इसके बाद कबीर दोहो को संगीत के साथ प्रस्तुत कर उनकी व्याख्या की गई साथ ही श्रीमद् भागवत गीता के श्लोकों के माध्यम से ईश्वर का सच्चे मन से स्मरण करने के लिए प्रेरित किया गया।
सत्संग में सर्वप्रथम समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने श्रीमद् भागवत गीता के अध्याय 8 क श्लोक संख्या 14 अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः। तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः की व्याख्या करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करता है, उस भक्त के लिए ईश्वर सदैव सुलभ रहते हैं। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने बताया कि जब तक प्राण है तब तक ईश्वर का स्मरण करते रहना चाहिए, मृत्यु के बाद तो सभी सदैव के लिए सो जाएंगे। कबीर दोहा “कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी, एक दिन तू भी सोवेगा लम्बे पांव पसारी“ अर्थात् तुम अज्ञान और माया की नींद में क्यों सोए रहते हो, उठो और ईश्वर की भक्ति में लग जाओ, क्योंकि एक दिन तुम हमेशा के लिए सो जाओगे। डॉ. अनुरागी ने कहा कि यह दोहा जीवन की नश्वरता और ईश्वर भक्ति की महत्ता पर जोर देता है और हमें जागृत होकर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का आह्वान करता है।
सत्संग में पंडित आशाराम तिवारी ने साच बराबर तप नहीं कि व्याख्या करते हुए कहा कि सत्य का आचरण करना सबसे बड़ा पप है। पंडित हरीशंकर नायब ने कहा कि सत्संग से धर्म अर्थ काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। पंडित जगदीश रिछारिया ने भजन रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही यह सृष्टि चला रहे हैं, जो पेड़ हमने लगाए पहले, उसी का फल अब हम पा रहे हैं.... सुनाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। भजन गायब संगम सिंह चंदेल ने बुंदेली भजन जीपे चढ़ो राम को रंग, उन्हें न चान्हे कोनऊॅ संग भजन सुनाया तो वहीं कामता प्रसाद चौरसिया ने भजन कब भजहौ सतनाम सुनाया। ढोलक वादन करते हुए ऋषि शर्मा ने शानदार भक्ति रचना एक बार जो रघुवर की नजरों का इशारा हो जाए..... प्रस्तुत किया। अंत में समिति प्रमुख द्वारा सभी को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर राजाराम चौरसिया, किशोरी अनुरागी, आशाराम तिवारी सहित तमाम कबीरी भक्त मौजूद रहे।
सत्संग में भजन व दोहों के माध्यम से ईश्वर का सच्चे मन से स्मरण करने पर दिया जोर
September 14, 2025
Tags

